भगोड़े जवान ने सेना में भर्ती के नाम पर ठग लिए करोड़ों रुपए, अब जाकर हुआ गिरफ्तार

सेना में भर्ती कराने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले छह वर्ष पूर्व सेना से भागे जवान को गिरफ्तार किया गया हैं।आर्मी इंटेलीजेंस व यूपी एसटीएफ की कानपुर यूनिट दो महीने से उसकी धरपकड़ में लगी थीं।गिरफ्तार जालसाज भर्ती के नाम पर 150 लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुका हैं।
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सेना में भर्ती कराने के नाम पर अन्तरराज्यीय स्तर पर ठग गिरोह का खुलासा रविवार को कानपुर आर्मी इंटेलीजेंस व उत्तर प्रदेश स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने सेना से भगोड़े जावन को गिरफ्तार कर किया हैं।रैकेट को संचालित कर रहे असम में उपथिति के दौरान 2013 से भागा जवान कई सालों में करीब 150 लोगों को सेना में नौकरी का झांसा देकर करोड़ों की ठगी कर चुका हैं।
उसे पकड़ने में उस समय कामयाबी प्राप्त हुई जब कानपुर आर्मी इंटेलीजेंस को शिकायतें मिली।शिकायतों के आधार पर दो महीने पूर्व आर्मी इंटेलीजेंस ने कानपुर एसटीएफ यूनिट के साथ संयुक्त आपरेशन प्रारम्भ किया।आर्मी इंटेलीजेंस ने एसटीएफ के साथ जाल बिछाया और चकेरी के एयरपोर्ट इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया।

जबकि एसटीएफ ने अभियुक्त की गिरफ्तारी कैंट थाना एरिया में सर्किट हाऊस तिरहे के पास से दिखाई है और गिरफ्तार में लेकर पूछताछ की जा रही हैं।गिरफ्तार ठग उन्नाव जनपद के बीघापुर के ग्राम व पोस्ट रैथाना आलोक कुमार अवस्थी हैं।उसके कब्जे से सेना का आई कार्ड सहित सेना से जुड़े कई दस्तावेजों के साथ ही ठगी के रुपयों से खरीदी गई कार बरामद की गई हैं।

इंटरनेट से करत था संपर्क
जालसाज ने उत्तराखंड,मध्यप्रदेश,बिहार से देश के कई हिस्सों से 150 लोगों से ठगी किये जाने की बात कबूल की गई हैं।लेकिन यह संख्या इससे बहुत अधिक हो सकती है, जिनकी जानकारी की जा रही।इसके इंडियन आर्मी के अधिकारियों के सम्बंध में भी खंगाले जा रहे हैं।कैंट पुलिस गिरफ्तार जालसाज के खिलाफ विधिक कार्यवाही में जुट गई हैं।

खुद को बताता था जूनियर कमीशन अधिकारी
गिरफ्तार भगोड़ा जवान आलोक लोगों को भर्ती के नाम पर ठगने के लिए खुद को सेना का जूनियर कमीशन अधिकारी (जेसीओ) बताया था।इसके लिए वह बकायदा फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग करता था और उन्हें दिखाकर लोगों को विश्वास में लेता था।उसके पास से बरामद सेना भर्ती का 2010 में आठ जून का मद्रास इंजीनियर ग्रुप सेंटर में एसपीआर पद का लागू आई कार्ड मिला हैं।

जाली दस्तावेज दिखाकर बनाता था शिकार
आलोक अपने रिश्तेदारों व दोस्तों के माध्यम सम्पर्क में आये लोगों को अपना शिकार बनाता था।वह उन्हें भारतीय सेना का परिचय पत्र व कैंटीन स्मार्ट कार्ड व कुछ लोगों को इंटरनेट व वाट्सएप दिखकार उन्हें विश्वास में लेता था।
इसके बाद वह उन्हें बताया था कि उसके सेना में उपथित कई कर्नल व कई बड़े अधिकारियों से परिचय है, जिसके जरिये वह उनकी भर्ती करवा देगा।झांसा देने के लिए अपने लिकर कार्ड से लोगों को सेना कैंटीन से सामान भी दिलवा देता था।विश्वास हो जाने पर वह उनसे तीन से पांच लाख रुपये ले लेता था। कुछ लोगों से अपने खाता में व कुछ लोगों से नगद रुपये लेता था।

हाल में इन्हें ठगा

भर्ती के नाम पर आलोक अवस्थी ने नीरज अग्रहरि, ओमप्रकाश धुशिया, राजवीर सिंह, विपिन रौधाड़, सोमलता, पीयूष, भवानी व लालबंगला के डे-अस्पताल में कार्यरत कंपाउंडर मिश्रा से रुपये लिये थे।