एक वर्ष से मंदिरों में रात गुजार रहा था ये बुजुर्ग, जानिए क्या है इसके पीछे की असीलियत

पिता अपने बच्चों को बड़ा कर इस योग्य बनाता है कि वे उसकी बुढ़ापे की लाठी बनेंगे। किन्तु कुछ कलयुगी बेटा ऐसे भी हैं, जो जीवन पर्यन्त परिश्र्म करने वाले पिता को बुढ़ापे में दुत्कार देते हैं। ऐसा ही कुछ मामला जिले के निम्बाहेड़ा उपखंड क्षेत्र के सांगरिया गांव में देखने को मिला है, जहां दो पुत्रों ने अपने पिता को घर से निकाल दिया।
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डेढ़ वर्ष से वृद्ध पिता मंदिर एवं देवरों में रात गुजार अपनी जिंदगी के बचे दिन गुजार रहा है। मंगलवार को वृद्ध ने अपनी व्यथा चित्तौडग़ढ़ जिला मुख्यालय पर बैठक में भाग लेने आए निम्बाहेड़ा उपखंड अधिकारी को सुनाई है। उपखंड अधिकारी ने इसे निम्बाहेड़ा बुलाया है, जहां नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जानकारी के मुताबिक, निम्बाहेड़ा के सांगरिया निवासी कालू मेघवाल (80) जो कि किसी वक्त में 10 बीघा जमीन का मालिक हुआ करता था। 
इसके गांव के पास एक औद्योगिक इकाई की शुरूआत हुई तो इसकी 7 बीघा भूमि अवाप्त हो गई। बची रही भूमि पर भी इसे बहला फुसला कर उसके बेटों ने अपने नाम करवा ली। वहीं सात बीघा जमीन के अधिग्रहण के बाद मिली 14 लाख रूपए की राशि को भी पुत्रों ने हड़प लिया। जमीन और अवाप्ति की राशि हड़प करने के बाद पुत्रों ने वृद्ध को प्रताडऩा देना शुरू कर दिया। पुत्रों की प्रताड़ना से परेशान होकर कालू अपने घर से निकल गया। तकरीबन एक वर्ष से यह वृद्ध बुजुर्ग मंदिरों और देवरों में अपना जीवन बिता रहा है। 
लाखों की संपत्ति का मालिक यह वृद्ध अब मांग कर खाने को मजबूर है। दर-दर भटककर अपनी जिंदगी मुफलिसी में गुजार रहा है। बुधवार को कालू मेघवाल जिला मुख्यालय पर आया। कलेक्ट्रेट परिसर में बुधवार को सभी उपखंड अधिकारी व जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक थी। इसमें हिस्सा लेने के लिए निम्बहेड़ा एसडीएम पंकज शर्मा भी चित्तौड़गढ़ आए हुए थे। इस पर वृद्ध ने उपखंड अधिकारी को अपनी कथा बताई। उपखंड अधिकारी ने वृद्ध कालू मेघवाल को निम्बाहेड़ा बुलाया है तथा इस मामले में सही कार्रवाई का आश्वासन दिया है।