इस महिला के नहीं हैं भाई, और फिर 300 भाई पहुंच गए इस महिला के घर

दरअसल, राजस्थान के नागौर जिले के गांव घाटवा निवासी हलीमा की पड़ोसी जिला सीकर ​के गांव सुरेरा में नाथू साईं के साथ शादी हुई थी। हलीमा के कोई सगा भाई नहीं होने के कारण उसने सुरेरा में कूड़ी परिवार को धर्म का भाई बना रखा है। दोनों अलग-अलग मजहब के होने के बाद बावजूद यह रिश्ता सगे भाई-बहन की तरह​ ​वर्षों से निभाया जा रहा है। 
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कूड़ी परिवार में जब भी कोई कार्यक्रम होता तो है तो हलीमा को भी सगी बहन की याद किया जाता है और वह भी बहन की हैसियत से उपस्थित होती है। जब हलीमा कूड़ी परिवार में भाइयों के राखी बांधने पहुंची, वहीं दूसरे दिन 16 अगस्त को हलीमा के बेटे आरिफ खान की शादी में कूड़ी परिवार भात लेकर आया।
गांव सुरेरा के शिक्षक राकेश वर्मा ने बताया कि जाट समाज के रामदेवराम, मूंगाराम, हीरा कुड़ी, सुंडाराम, बन्नाराम, शंकर, सुवालाल, मदन, नारायण कूड़ी आदि शुक्रवार को हलीमा के घर गाजे-बाजे से भात लेकर आया। दोनों बहन-भाई के परिवार को देख लगा ही नहीं कि दोनों के धर्म अलग है। बोली और पहनावा भी भिन्न है। भात में न केवल जाट समाज बल्कि सर्व समाज के करीब 300 महिला-पुरुष शामिल हुए। इनमें ईश्वर बलाई, भूरा रैगर, बजरंग मीना, भँवर खान, हनीफ, हुसैन मनियार, माले खान तेली, अब्दुल, सदाम, इस्लाम, असलम भी शामिल थे।

हर रस्म-रिवाज अच्छे से निभाए गए
हिन्दू भाइयों की ओर से मुस्लिम बहन के भरे गए इस भात की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसमें दोनों धर्मों के रस्मों रिवाजों को शिद्दत से निभाया गया। बहन के लिए भात की चूनरी, आभूषण व नकद राशि भी भेंट की गई है। यही नहीं बहन के परिवार के पुरुषों को जुआरी भी दी गई।

पिता का भी स्नेह ​दे रहा है कूड़ी परिवार
घाटवा निवासी हलीमा बानो के पिता का देहांत हुआ और कोई भी सगा भाई ना होने के कारण से सुरेरा निवास मूंगा कूड़ी ने हलीमा बानो को अपनी धर्म की बेटी बना लिया।तब से आज तक समस्त कूड़ी परिवार हलीमा बानो को अपनी सगी बहन की तरह तवज्जो देता है। अपने सभी सामाजिक कार्यों में शरीक करते हैं। सीकर जिले के इस जाट परिवार ने साम्प्रदायिक सौहार्द की जो मिसाल पेश की, उस पर पूरे गांव ने उनकी सराहना की। भात में महिलाओं ने भी उत्सापूर्वक हिस्सा लिया। जाट परिवार की राधा देवी, सोहनी देवी, सुखी देवी, संतोष देवी, पप्पू देवी, अनिता व मोनिका आदि भी बतौर भाती बनकर आए। गांव की मदीना मस्जिद के मौलवी इजरार खान ने इसे हिन्दू मुस्लिम समुदाय के सौहार्द की मिसाल बतााय।