झोपड़ी में रह रहे एक परिवार को लड़कों ने स्वतंत्रता दिवस पर गिफ्ट किया बंगला, जानें क्या था ऐसा कारण

मध्यप्रदेश के इंदौर में रह रहे युवाओं ने एक कमाल का काम कर दिया है। आपको बता दें की स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 27 साल बाद एक शहीद परिवार को झोपड़ी से आजादी दिलाई है। शहीद के परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं था। पत्नी परिवार के साथ एक झोपड़ी में रह रही थी। शहर के कुछ युवाओं ने आपस में चंदा इकट्ठा किया।
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युवाओं ने कुल मिलाकर 11 लाख रुपये जमा किए। उसके बाद झोपड़ी के बगल में एक शानदार छोटा सा बंगला परिवार के लिए बनवा दिया। युवाओं ने शहीद की पत्नी को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर घर की चाभी सौंप दी। युवाओं के इस सराहनीय पहल की इलाके में खूब तारीफ हो रही है। दरअसल, पीर पीपल्या गांव के मोहन सिंह बीएसएफ में थे। असम में पोस्टिंग के दौरान वे 31 दिसंबर 1992 में शहीद हो गए थे। उनका परिवार तब से ही कच्चे मकान में रह रहा था। 
उनकी हालत देख कुछ युवाओं ने वन चेक-वन साइन नाम से अभियान शुरू किया। और कुल 11 लाख रुपये जमा किए। बीएसएफ जवान मोहन सिंह जब शहीद हुए, उस वक्त उनका तीन वर्ष का एक बेटा था और पत्नी राजू बाई चार माह की गर्भवती थीं। बाद में दूसरे बेटे का जन्म हुआ। पति की शहादत के बाद दोनों बच्चों को पालने के लिए पत्नी ने मेहनत-मजदूरी करते हुए झोपड़ी में ही परिवार गुजारा कर रहा था। टूटी-फूटी छत पर चद्दर, बांस-बल्लियों के सहारे जैसे-तैसे खड़ा हुआ।
वहीं, विडंबना यह रही कि परिवार को अभी तक किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया। शहीद परिवार के हालत देख कुछ युवाओं ने यह पहल शुरू की। अभियान से जुड़े विशाल राठी ने बताया कि मकान बनाने के लिए 11 लाख रुपये इकट्ठा भी हो गए, जिससे दस लाख रुपये में शहीद मोहन सिंह सुनेर का घर तैयार हो गया। इसके साथ ही एक लाख रुपये में मोहन सिंह की प्रतिमा तैयार करा ली है, जिसे पीर पीपल्या मुख्य मार्ग पर लगाया जाएगा।