30 साल अमेरिका में रहे, अब खुद की जमीन पर बना रहे हैं एक ऐसा घर जहाँ एक साथ रहें बुजुर्ग

भोपाल शहर के प्लेटिनम प्लाजा माता मंदिर निवासी 71 वर्षीय सुधाकर शर्मा ने 30 साल अमेरिका में ऑफसेट प्रिंटिंग का बिजनेस किया। वहां के जीवन से ऊब गए तो बेटों से कहा कि अब बाकी का जीवन अपने देश में ही बिताऊंगा। वर्ष 2008 में पत्नी मीनाक्षी के साथ स्वदेश लौटे। दस साल तक पत्नी के साथ रहे। 29 जुलाई 2018 को ब्रेन हेमरेज से पत्नी की मौत हो गई। उनकी इच्छानुसार उनके अंग दान किए। बीते डेढ़ साल से सुधाकर शर्मा एकाकी जीवन गुजार रहे हैं। 
कोई और बुजुर्ग इस तरह अकेले जीवन न गुजारे, साझा चूल्हे की परंपरा बनी रहे और वृद्धजन पारिवारिक माहौल में आनंद के साथ रहें, इन उद्देश्यों को लेकर अब खुद की जमीन पर बुजुर्गों के लिए आवास बनाने का काम शुरू कराया है। शर्मा ने साल 2012 में महर्षि विद्या मंदिर के पास 7700 वर्गफीट जमीन डेढ़ करोड़ में खरीदी थी। अब 65 साल व इससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए आशियाने बना रहे हैं। 

एक भी फ्लैट नहीं बेचेंगे

सुधाकर शर्मा बुजुर्गों के लिए आवास बनाने की अनुमति लेने ननि की भवन अनुज्ञा शाखा पहुंचे। आवेदन देख निगम अधिकारियों ने समझा कि इमारत का व्यावसायिक इस्तेमाल होगा और अनुमति देने से मना कर दिया। फिर नया आवेदन दिया, जिसमें लिखा कि एक भी आवास नहीं बेचेंगे और सभी आवासों में बुजुर्ग ही रहेंगे। इस शर्त पर निगम ने भवन बनाने की अनुमति दी।

बेटे भी कर रहे सहयोग
सुधाकर शर्मा बताते हैं कि बड़ा बेटा क्षितिज अमेरिका में डॉक्टर है। छोटा बेटा गगन दिल्ली में नौकरी कर रहा है। दो करोड़ रुपए लोन लिया है। बाकी व्यवस्थाओं के लिए जो खर्च आएगा, वो बेटे और डॉ अनुराधा दफर, अक्षत शर्मा के सहयोग से पूरा होगा। शर्मा ने बताया कि भोपाल में इतने बढ़े स्तर पर लोगों ने सिर्फ बुजुर्गों के लिए कोई भवन नहीं बनाया।

मामूली किराया लेंगे

एक साल में बुजुर्गों के आवास बनकर तैयार हो जाएंगे। अगली दीवाली के दीप जलने के बाद बुजुर्गों को प्रवेश कराया जाएगा। इस कार्य में सुधाकर शर्मा का साथ दे रहे अरेरा कॉलोनी ई-7 में रहने वाले समाजसेवी गिरीश वाघ ने बताया कि हमें कोई लाभ नहीं कमाना है। लोन की किस्त जमा होती रहे इसलिए बुजुर्गों से मामूली किराया लिया जाएगा।

साझा चूल्हा रहेगा, टाइल्स ऐसे कि कोई न फिसले

सुधार शर्मा ने बताया कि चार मंजिला इमारत में 32 फ्लैट बनाए जाएंगे। ऐसे टाइल्स लगाए जाएंगे, जिन पर बुजुर्ग फिसले न। सात फीट लंबी लिफ्ट लगाई जाएगी। एक ही बड़ा रसोईघर बनाया जाएगा, जिसमें सभी के लिए खाना बनेगा। छत पर गार्डन बनाया जाएगा। प्राथमिक उपचार की सुविधा भी दी जाएगी।