पिता नहीं करते थे अपने बेटी से प्यार, इसलिए बेटी ने अपने पिता के साथ करवाया ऐसा गलत काम....

भुता में हुए बाबूराम हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। बाबूराम की बेटी ने अपने दो दोस्तों से मिलकर पिता बाबूराम की हत्या कराई थी। पुलिस ने बाबूराम की बेटी और उसके दो साथी हत्या आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। उनके पास से तमंचे और बाइक बरामद की गई है। भुता के बाबूराम पांच अक्टूबर को घर से अचानक लापता हो गए। परिवार के  लोगों ने उन्हें आसपास से लेकर रिश्तेदारों में तलाश किया। लेकिन बाबूराम का पता नहीं लगा। बाबू राम के बेटे विमल ने भुता थाने में में पिता की गुमशुदगी दर्ज कराई। सात अक्टूबर को पुलिस ने फैजनगर गांव के पास खेत में बाबूराम का सिर कटा शव बरामद किया गया।
बाबूराम के बेटे विमल ने जमीन के रंजिश में हत्या का शक जताते हुए पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने हत्याकांड का पर्दाफाश करने के लिए जांच शुरू की तो हत्या में बाबूराम की बेटी माधुरी के शामिल के संकेत मिलने लगे। गुरुवार की रात पुलिस ने घेराबंदी करके भुता कस्बे से बाबूराम की बेटी माधुरी उसके दोस्त पीलीभीत के बरखेड़ा के गांव मुड़िया हुलास के प्रदीप और बिलसंडा के मानपुर के सुरेंद्र पाल को गिरफ्तार किया। पुलिस पूछताछ में बाबूराम की बेटी माधुरी और उसके साथियों ने बाबूराम हत्याकांड का सनसनीखेज पर्दाफाश किया।

भाई को ज्यादा महत्व देने पर माधुरी ने दोस्त से मिलकर करा दी पिता की हत्या
भुता के बाबूराम का हंसता खेलता परिवार था। बाबूराम अपने बेटे विमल और बेटी माधुरी को पढ़ा लिखा कर आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश कर रहे थे। दोनों बीए की पढ़ाई कर रहे थे। गुरुवार की रात पुलिस ने बाबूराम की बेटी माधुरी के साथ उसके दोस्त प्रदीप और सुरेंद्र को गिरफ्तार करके पूछताछ की तो पुलिस के होश उड़ गए। पुलिस पूछताछ में माधुरी ने बताया की पिता बाबूराम उसके भाई विमल  को ज्यादा महत्व देते थे। घर में जो भी काम होता वह विमल के ही कहने पर किया जाता था। बाबूराम अपनी बेटी माधुरी से बात करना भी पसंद नहीं करते थे। इसकी वजह से माधुरी में पिता के प्रति बेहद गुस्सा सुलग रहा था।
माधुरी की मांमी टिंपल पीलीभीत के बरखेड़ा के गांव मुड़िया हुलास के प्रदीप कुमार की बरेली में चल रही विद्या हर्बल के प्रोडक्ट खरीदने के लिए जाती थी। एक दिन माधुरी अपनी मांमी टिंपल के साथ प्रदीप के शोरूम पर हेल्थ  के प्रोडक्ट खरीदने गई। इसके बाद माधुरी की प्रदीप से जान पहचान हो गई। दोनों की फोन पर वार्ता होने के बाद प्रेम संबंध शुरू हुए। पिता की बेरुखी से परेशान माधुरी ने प्रदीप से मिलकर अपना दुखड़ा सुनाया। जिसके बाद प्रदीप ने माधुरी का दुख देखकर उसके पिता की हत्या करने की योजना बनाई। पांच अक्टूबर को  प्रदीप ने अपने दोस्त सुरेंद्र के फोन से बाबूराम को फोन करके गन्ने का सर्वे कराने का झांसा देकर खेत पर बुला लिया। 

इसके बाद माधुरी के सामने प्रदीप और सुरेंद्र ने बाबूराम की गोली मारकर हत्या कर दी। बाबूराम का कई घंटे शव खेत में पड़ा रहा। रात होने के बाद प्रदीप और सुरेंद्र ने फैजनगर गांव के पास बाबूराम का शव फेंक दिया। पहचान मिटाने के लिए बाबूराम का गला काट दिया। पिता की मौत के बाद माधुरी प्रदीप के साथ रह रही थी। भुता इंस्पेक्टर राजवीर सिंह परमार ने बताया की तीनों को जेल भेज दिया गया। उनके पास से दो तमंचे और कारतूस व बाबूराम की बैंक की पासबुक बरामद की गई है।