ऐसी प्रेम कहानी, जिसको पढ़ने के बाद आपको भी दोस्ती से विश्वास उठ जाएगा...जानें

संजय ओझा के ईट भट्ठे के पास एक लाश पड़ी हुई थी। उस पर मक्खियाँ भिनभिना रहीं थी। लाश पर कोई भी ऐसा निशान नहीं दिख रहा था। जिससे पता लगाया जा सके कि उस व्यक्ति की ह्त्या कैसे हुई है। कुछ लोग जब भट्ठे की तरफ गए तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सूचना के बाद तुरंत मौके पर पुलिस आ गई। आखिर कौन वो व्यक्ति था और उसकी ह्त्या कैसे हुई थी। आइये जानते हैं।
गोरखपुर के हरपुर बुदहट में सुभाष अपनी पत्नी अंकिता के साथ रहता था। सुभाष की शादी को दो साल हुए थे। उसकी पत्नी अंकिता बहुत ही खूबसूरत थी। सुभाष भी उस पर अपनी जान छिड़कता था। पास में ही परमेश्वरपुर के रहने वाले चंद्रभान से सुभाष की बहुत गहरी दोस्ती थी। अक्सर चन्द्रभान सुभाष के घर आया जाया करता था। एक दिन चन्द्रभान घर आया तो उस समय सुभाष घर पर नहीं था। चन्द्रभान की पहले से ही सुभाष की पत्नी पर नजर थी। उस दिन उसे मौक़ा मिला और उसने अंकिता से अपने प्यार का इजहार कर दिया। अंकिता थोड़ी शर्माई और हाँ में हाँ मिला दी। इसके बाद जब भी सुभाष घर पर नहीं होता तो चंद्रभान आता और मस्ती करता था। सच ही कहा गया कि प्यार की बातें ज्यादा दिन नहीं छुपतीं। एक दिन सुभाष के एक पड़ौसी ने उसे बताया कि तुम्हारे काम पर जाने के बाद ही चंद्रभान तुम्हारे घर आता है। सुभाष ने जब अंकिता से पूछा तो उसने साफ़ मना कर दिया।
एक दिन सुभाष घर से काम के लिए निकला किन्तु काम पर नहीं गया और दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया। सुभाष ने चन्द्रभान को बहुत ही बुरा भला कहा और भगा दिया। इसके बाद सुभाष अंकिता पर सख्त निगरानी भी रखने लगा। जब चन्द्रभान और अंकिता की मुलाक़ात नहीं हो पायी तो दोनों बिना जल मछली की तरह तड़पने लगे। एक दिन सुभाष की अनुपस्थिति में चन्द्रभान अंकिता से मिलने आ गया। अंकिता ने कहा चन्द्रभान अब हम लोगों का मिलना बहुत मुश्किल है और मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकतीं हूँ। बस इतना कहने ही चन्द्रभान और अंकिता ने एक खतरनाक प्लान बना लिया।
कुछ दिन बाद ही अंकिता को एक लड़का हुआ और उसके कुछ दिन बाद ही सुभाष ने सभी को दावत पर बुलाया। सारे गिले और सिकवे भुलाकर सुभाष ने चन्द्रभान को भी बुला लिया। दावत में चंद्रभान काफी मेहनत करता रहा और जब सभी लोग खा पी कर चले गए तो रात में चन्द्रभान ने सुभाष से कहा चलो यार भट्ठे पर चलकर पीते हैं। सुभाष भी तैयार हो गया। 
भट्ठे के पास दोनों ने शराब पी और चन्द्रभान ने गमछे से सुभाष का गला घोट दिया। अगली सुबह जब लोगों ने लाश की शिनाख्त सुभाष के रूप में की तो उसकी पत्नी अंकिता को भी बुलाया गया। जिसने लाश को पहचानने से मना कर दिया। इसके बाद सुभाष के चाचा और भाई ने लाश की शिनाख्त की। इसी शक के आधार पर पुलिस ने अंकिता और चन्द्रभान को गिरफ्तार कर लिया। चन्द्रभान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। दोनों आरोपी अभी पुलिस की रिमांड में हैं।