जब बग्घी पर सवार होकर बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची दुल्हन, जानिए पूरा....

राजस्थान के अलवर जिले के ग्रामीण क्षेत्र की एक दूल्हे और दुल्हन ने अपनी शादी में मिसाल पेश की है. शादी में दुल्हन खुद बग्घी में सवार होकर दूल्हे के गांव में शादी स्थल पर पहुंची, जहां दुल्हन का स्वागत किया गया. बता दें कि इस शादी में प्लास्टिक  पूरी तरह से प्रतिबंधित था. वहीं इस शादी में आए रिश्तेदारों को गिफ्ट में पौधे देकर पर्यवारण को बचाने का भी संदेश दिया गया.

 शादी में इको फ्रेंडली पर्यावरण का दिया संदेश
जिले में दलित समाज के परिवार ने अनूठी शादी कर समाज के लोगों मे मिसाल पेश की है. कारोली गांव निवासी अजय सिंह ने अपनी खुद की बारात दुल्हन के घर ले जाने के बजाय दुल्हन को बग्घी पर बैठकर अपने यहां गांव में बारात लेकर बुलाया. जहां दूल्हे के परिजनों परिजनों ने दुल्हन का स्वागत किया. सोमवार को हुई इस शादी में बकायदा बबीता की सुसराल के गांव में घुड़चढ़ी की तर्ज पर बग्घी में सवारी निकाली गई, इससे भी बढ़कर इस पूरी शादी में इको फ्रेंडली पर्यावरण का संदेश दिया गया. शादी में आए मेहमानों को पौधे दिए गए दहेज के बहिष्कार वाली इस शादी में प्लास्टिक का भी उपयोग नहीं किया गया. डिस्पोजल की जगह खाने के लिए भी स्टील के बर्तन और प्लास्टिक के गिलास की जगह कुल्हड़ों का इस्तेमाल किया गया. शादी में गिलास की जगह कुल्हड़ों का किया गया इस्तेमाल शादी में मेहमानों को संविधान की पुस्तक और पौधे किए वितरित. 

शादी में बरातियों को वितरित किए गए पौधे
डिजिटल इंडिया का उपयोग करते हुए रिश्तेदारों व मेहमानों को सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश ओर कार्ड भेजे गए . विवाह में शामिल होने आए सभी मेहमानों को संविधान की पुस्तक और पौधे वितरित किए गए. यही नहीं गांव में युवाओ को आगे बढ़ाने के लिए दूल्हे अजय के द्वारा गांव में नि:शुल्क सार्वजनिक पुस्तकालय भी बनाया गया है. 
दूल्हा अजय जाटव ने बताया कि वे विवाह के मौके पर गांव में एक नि:शुल्क सार्वजनिक पुस्तकालय की शुरुआत कर रहे हैं. इस विवाह को लेकर ग्रामीणों और समाज के लोगों में भारी उत्साह दिखाई दिया. सभी जाति और धर्म के लोग इस शादी में शामिल हुए. सामाजिक कुरितियों का सामना करते आए गांव के लोग इस सकारात्मक पहल को लेकर खुश दिखे.