दम तोड़ गई मां, गुस्साए परिजन बोले-डॉक्टर ने कोई नस काट दी और फिर जो हुआ...

इंदौर जिले में निजी अस्पताल में डिलीवरी के दौरान एक महिला की हालत बिगडऩे के बाद चोइथराम अस्पताल शिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर शव अस्पताल ले जाकर जमकर विरोध जताया। परिजन का आरोप था कि डॉक्टर ने कोई गलत नस काट दी जिसकी वजह से मौत हुई है। पुलिस ने शव का पीएम कराकर मामले की जांच शुरू कर दी है। सोमवार को लालबाग लाइन निवासी प्रीति पति हेमेंद्र शुक्ला को परिजनों ने डिलीवरी के लिए न्यू पलासिया स्थित कोरल अस्पताल में भर्ती कराया था। भाई आनंद तिवारी के अनुसार, शादी के पांच साल बाद डिलीवरी हुई थी। 9 महीने से डॉ. पुष्पा पुरोहित इलाज दे रहीं थी। सोमवार सुबह 8 बजे परिजन प्रीति को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टर ने उन्हें दो घंटे बाद ऑपरेशन करने की बात कही। प्रीति ने बच्ची को जन्म दिया। इस दौरान डॉक्टरों ने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य हैं। करीब डेढ़ घंटे बाद स्टाफ ने बताया केस बिगड़ा है, 6 यूनिट ब्लड की व्यवस्था करें।

दूसरे अस्पताल ले जाने के दस्तावेज साइन कराए
दोपहर दो बजे चोइथराम अस्पताल शिफ्ट कर दिया गया। इस दौरान मर्जी से दूसरे अस्पताल ले जाने के दस्तावेज पर साइन करा लिए, जहां शाम 6 बजे मृत घोषित कर दिया गया। महिला की मौत के बाद गुस्साए परिजन शव लेकर कोरल अस्पताल पहुंचे और हंगामा किया। उन्होंने आरोप लगाया ऑपरेशन के दौरान कोई नस कट गई, जिससे खून बहना बंद ही नहीं हुआ। परिजनों ने इलाज करने वाली डॉक्टर को बुलाने की मांग की। हंगामे की सूचना पर तुकोगंज पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाइश देकर शांत किया। मंगलवार को एमवाय अस्पताल में डॉक्टरों की पैनल ने शव का पीएम किया गया। पीएम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

सोनोग्राफी में नहीं बताई परेशानी

परिजनों का आरोप है, डॉ. पुष्पा ने प्रेस्टीज मेडिकल इंवेस्टिगेशन नवलखा पर सोनोग्राफी कराई थी। रिपोर्ट में क्रिसेंटा और यूट्रस नार्मल बताया गया था। मरीज को ओटी में ले जाने के बाद परेशानी बताई गई, जांच में पता चल जाता तो जान नहीं जाती। मरीज का सीजर करने से पहले सभी रिपोर्ट नार्मल थीं। सीजर के दौरान पता चला यूरिन वॉल से जुड़ा रहने वाला क्रिसेंटा परक्रीटा चिपका हुआ था। इस कारण यूट्रस में काफी ब्लीडिंग शुरू हो गई। एडेंटर पर जानकारी देकर बच्चादानी निकालने का ऑपरेशन की तैयारी की गई। 10 डॉक्टरों की टीम ओटी में मौजूद थी। इस दौरान मरीज शॉक में चली गई। रिवाइव करने की पूरी कोशिश की गई। वेंटिलेटर से लैस एंबुलेंस में चोइथराम अस्पताल शिफ्ट किया गया। जहां डॉ. नीलू सोनी ने इलाज शुरू किया। मैं भी वहां मरीज को देखने गई। ६ बजे सूचना मिली कि कार्डियक अरेस्ट से मरीज की मौत हो गई है।