किसी महंगी गाड़ियों से भी महंगी है 'चंपा-चमेली' की जोड़ी, इसकी कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान...

आगरा से करीब 75 किलोमीटर दूर यमुना किनारे बसे बटेश्वर में इन दिनों उत्तर भारत के प्रमुख पशु मेले की धूम है। कई राज्यों के पशु व्यापारी यहां डेरा जमाए हुए हैं। मेले में ऊंट, बैल, घोड़े, खच्चर, गधे, बकरी आदि पशु बिक्री के लिए लाए गए हैं। उम्दा नस्ल के घोड़ों की कीमत लग्जरी गाड़ियों से भी ज्यादा है, वहीं नकुली नस्ल की घोड़ी 'चंपा-चमेली' की जोड़ी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बटेश्वर पशु मेले में कन्नौज के उस्मान सेठ नकुली नस्ल की घोड़ी चंपा और चमेली की जोड़ी लेकर आए हैं। उस्मान ने बताया कि दोनों की कीमत करीब 47 लाख रुपये है। चंपा 18 महीने की है। 
इसकी कीमत 25 लाख रुपये रखी है। वहीं 20 महीने की चमेली की कीमत 22 लाख रुपये है। उस्मान ने गढ़मुक्तेश्वर के मेले से दोनों को 38 लाख में खरीदा था। दोनों घोड़ियों की खुराक पर हर रोज करीब एक हजार रुपये खर्च होते हैं। प्रशिक्षण के लिए 10 हजार की पगार पर उस्ताद भी रखा है। उस्मान ने बताया कि दोनों घोड़ी नकुली नस्ल की होने के साथ ही अपने नयन नक्श और कानों से लेकर पैरों तक खूबसूरत हैं। चाल बेमिसाल है। दौड़, नाच में भी पारंगत हैं। दोनों के अभी दांत नहीं निकले हैं। मेले में 'चंपा-चमेली' की जोड़ी से पारखियों की नजर हट ही नहीं रही। 
दोनों घोड़ियों की खरीद के लिए पारखी पहुंच रहे हैं। अब तक इस जोड़ी की कीमत 42 लाख रुपये लग चुकी है। रेगिस्तान में सबसे तेज चाल के लिए बालत्तर प्रजाति के ऊंट विख्यात है। बीकानेर के राजवीर सिंह बालत्तर प्रजाति के 14 ऊंट लेकर बटेश्वर मेले में पहुंचे हैं। जिनकी कीमत 60 से 95 हजार रुपये तक है। इसके अलावा मेले में नागौरी, हड़ौती, बीकानेरी, अजमेरी, बाड़मेरी आदि किस्म के ऊंट 20 हजार लेकर 60 हजार तक में बिक रहे हैं। मेले में डेढ़ लाख रुपये कीमत तक के ऊंट हैं।
करीब एक महीने तक चलने वाले इस पशु मेले को लेकर जिला प्रशासन ने खास इंतजाम किए हैं। मेले में सुरक्षा के लिए पांच पुलिस चौकी बनाई गई है। मेला कोतवाल बीआर दीक्षित ने बताया कि घोड़ा बाजार, ऊंट बाजार, नौरंगीघाट, मंदिर शृंखला, खच्चर बाजार में पुलिस चौकियां गठित कर फोर्स तैनात कर दिया गया है। आगरा की जनपद बाह तहसील के बटेश्वर गांव में यमुना किनारे 108 मंदिरों की शृंखला है। इन मंदिरों से यमुना नदी तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी हैं। ऐतिहासिक शिव मंदिर शृंखला के घाट और उनको छूकर बहती हुई यमुना नदी यहां पहुंचने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है।