2 साल से मांग रहा था भीख, घर का मोबाइल नंबर याद आया तो वह निकला करोड़पति और फिर

अंबाला कैंट की पुरानी अनाज मंडी में एक शख्स पिछले 2 साल से भीख मांगता दिखाई देता था. उसे मोबाइल नंबर याद आने पर पता चला कि उसका असली नाम धनंजय ठाकुर है, वह आजमगढ़ का रहने वाला है. सुनने में भले ये कहानी फिल्मी लगे लेकिन हरियाणा में हाल ही में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है. अंबाला कैंट की पुरानी अनाज मंडी में एक शख्स पिछले 2 साल से भीख मांगता दिखाई देता था. उसे मोबाइल नंबर याद आने पर पता चला कि उसका असली नाम धनंजय ठाकुर है, वह आजमगढ़ का रहने वाला है और दो बहनों का इकलौता भाई है. पिता कोलकाता की कंपनी में एचआर हैं. धनंजय की बहन नेहा लखनऊ से उसे ले जाने के लिए आई तो कहानी सामने आई.
गुरुवार की घटना है. धनंजय सिंह के पैर में चोट लग गई. पैर से खून बहता देख गीता गोपाल संस्था के सदस्य साहिल ने उन्हें अपने पास बुलाया और पट्टी बांधी. पूछा कि कहां के रहने वाले हो. धनंजय उसे तुरंत जगह का नाम नहीं बता सके क्योंकि दिमागी हालत ठीक नहीं थी. थोड़ी देर बाद एक मोबाइल नंबर याद आया. यह नंबर आजमगढ़ में लगा. कॉल किसी शिशुपाल ने उठाई और पता लगा कि वह 2 साल पहले गायब हुए धनंजय के चाचा हैं.

उन्होंने ही धनंजय का नाम लोगों को फोन पर बताया. शुक्रवार को धनंजय की बहन नेहा उसे लेने लखनऊ पहुंची. बहन को देखते ही धनंजय ने पहचान लिया. बहन ने बस इतना ही कहा कि जब नंबर याद था तो दो साल पहले फोन नहीं करवा सकते थे? दैनिक भास्कर के मुताबिक धनंजय ने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है. बहन नेहा ने बताया कि भाई सबका लाडला और जिद्दी है. नशे की लत लगने की वजह से दिमागी हालत बिगड़ गई और ऐसे ही एक दिन घर छोड़ दिया. परिवार वालों ने उसे खोजने की बहुत कोशिश की लेकिन कोई पता नहीं चला. लंबा वक्त होने के कारण घर वालों की उम्मीद टूट चुकी थी. लेकिन गुरुवार का दिन उन परिवार वालों के लिए चमत्कार बनकर आया और परिवार का खोया हुआ सदस्य मिल गया.