34 साल के बाद बोली महिला, "अब मैं चैन से सो सकती हूं" जानिए पूरी खबर

करीबन तीस साल तक प्रेमकंवर पर अपने ही बच्चे की हत्या का दर्द सहती रही। जमानत मिल जाने की वजह से प्रेमकंवर सलाखों के पीछे बंद नहीं थी लेकिन ग्रामीण परिवेश में रहते हुए उसका करीबन पूरा जीवन खत्म जैसे हो गया। अपील पर सुनवाई के दौरान प्रेमकंवर की ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ तो न्यायालय ने न्यायमित्र नियुक्त किया। तीस साल बाद गुरुवार को न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश एनएस ढड्डा ने प्रेमकंवर को बरी कर दिया।
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प्रेमकंवर की अपील 198 9 में दायर की गई अपील बीते दिनों राजस्थान उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुई। न्यायालय में प्रेमकंवर की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायालय ने अधिवक्ता शालिनी शेरॉन को न्याययमित्र नियुक्त किया। इस वक्त तक किसी को यह भी नहीं मालूम था कि प्रेमकंवर जिंदा भी है या नहीं। इस पर न्यायमित्र ने विधिक सेवा प्राधिकरण की सहायता से सेंट्रल से जानकारी जुटाने की कोशिश की। सरकारी वकील के पत्र पर थाना मालपुरा ने 4 जनवरी को रिपोर्ट दी कि महिला गांव में रहती है।न्यायमित्र शालिनी शेरॉन ने कहा कि ससुराल वालो की गवाही पर प्रेमकंवर को दोषी करार दिया गया। 

जबकि मामला पुर्नविवाह या दहेज प्रकरण से जुड़ा हो सकता है। घटना के एक साल के भीतर ही प्रेमकंवर के पति ने दूसरा विवाह कर लिया। प्रेमकंवर पर अपने ही बच्चे की हत्या का आरोप लगाया। गरीबी अशिक्षा की वजह से ससुराल से निकाले जाने के बाद पीहर आ गई। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया मामला न्यायालय तक पहुंचा। ट्रायल के बाद आजीवन कारावास की सजा न्यायालय ने सुनाई। माता पिता ने जैसे तैसे उच्च न्यायालय से सजा का स्थगित करवाया और बेटी को जमानत दिलवाई। लेकिन गरीबी और अशिक्षा के साथ कानूनी अधिकारों की जानकारी होने की वजह से प्रेमकंवर को ससुराल पक्ष की ओर से कोई मदद नहीं मिली। 

बल्कि घटना के एक साल बाद ही प्रेमकंवर के पति की बिना तलाक के दूसरी शादी करवा दी। प्रेमकंवर से न्यायमित्र के जरिए पत्रिका ने बात। मामले में बरी होने की जानकारी मिलने पर रोने लगी और बोली मैं अब चैन से सो सकती हूं। सालों साल निकल गए जेल में गुजारे दिन और आरोपों की वजह से कभी पूरी तरह से नींद नहीं आई। प्रेमकंवर ने बताया कि करीबन तीस साल पहले ससुराल वालो ने निकाल दिया था। इसके बाद घर आ गई। मां बाप थे तब तक फिर भी सहारा था लेकिन इसके बाद सब खत्म हो गया। खेतों में काम करके जीवन जी नहीं काट रही हूं।