र‍िश्‍तेदार को सबक सिखाने के लिए वकील बन गई ज्योति, 6 साल बाद काला कोट पहनते ही दर्ज कराई शिकायत

नगर के आवास विकास कॉलोनी की ज्योति मिश्रा ने ठग र‍िश्‍तेदार को सबक सिखाने के लिए वकालत की पढ़ाई की। वकालत का पंजीकरण कराने के बाद कचहरी पहुंची तो पहली शिकायत उनके खिलाफ ही की। समन्वित शिकायत प्रणाली (आइजीआरएस) पर खुद के साथ हुई घटना की जानकारी देते हुए अब वह कार्रवाई की पैरवी में जुटी हुई हैं। ज्योति के पिता उमाशंकर मिश्र गुजरात में एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। वो यहां मां उमा मिश्रा और छोटे भाई राघवेंद्र मिश्र के साथ रहती हैं। ज्योति वर्ष 2013 में स्नातक पास हुईं तो पिता की जिम्मेदारियां बांटने की कोशिश में नौकरी ढूंढने लगीं।  
इसी दौरान कस्बा फतेहपुर निवासी एक र‍िश्‍तेदार ने ग्राम विकास अधिकारी की नौकरी दिलाने का झांसा दिया। आरोप है कि इसके नाम पर उन्होंने 16 अक्टूबर 2013 को डेढ़ लाख फिर छह जनवरी 2014 को 50 हजार रुपये लिए। काफी दिनों तक भरोसा दिलाते रहे कि नियुक्ति पत्र मिल जाएगा, लेकिन एक साल बाद मोबाइल पर भी बात बंद कर दी। जब मुलाकात हुई तो र‍िश्‍तेदार ने रकम वापस करने से मना करते हुए जानमाल की धमकी भी दी। छह जनवरी को शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जांच कर रहे फतेहपुर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक पीके झा ने बताया कि रुपये के लेनदेन की पड़ताल के बाद रिपोर्ट दर्ज की जाती है। इसमें भी जांच के बाद कार्रवाई कराई जाएगी।

मानसिक पीड़ा से उपजा था संकल्प

पति से दूर रहकर दो बच्चों को पाल रही उमा मिश्रा के गृहस्थी की नैया जब भी डगमगाती वह आरोपी र‍िश्‍तेदार से ही राय लेेेेती। जिसे माझी माना उसी ने उनकी नैया डुबो दी तो परिवार सकते में आ गया। ज्योति के मुताबिक, पिता के दूसरे प्रांत में रहने के चलते जब दूसरे रिश्तेदारों से मदद मांगी तो लोगों ने कोर्ट-कचहरी की झंझट का डर दिखाकर शांत रहने को कह दिया। कुछ न कर पाने से काफी मानसिक पीड़ा हुई। पिता के मेहनत की कमाई यूं डूबी तो कानूनी झंझट से भिड़ने के लिए खुद को तैयार करने का निर्णय लिया। तय किया कि अब वकील बनकर परिवार को ठगने वाले र‍िश्‍तेदार को सबक सिखाऊंगी। फिर 2016 में टीका राम चतुर्वेदी लॉ कॉलेज सतरिख में प्रवेश लिया। दिसंबर में पंजीकरण कराकर विधि व्यवसाय शुरू किया है।