जिंदगी की जंग हार गई होनहार बिटिया, जानिए ऐसा क्या हुआ....

ज्योतिका रावत भी अन्य दूसरी लड़कियों की तरह थी, लेकिन उसके मन में कुछ गुजरने का जुनून था, वह अपने दम पर बहुत कुछ हासिल करना चाहती थी। उसने सपना तो जज बनकर आम लोगों को न्याय दिलाने का संजोया था, लेकिन कुछ ऐसी परिस्थिति सामने आ गई कि उसे लक्ष्य प्राप्ति का रास्ता बदलना पड़ा। टीचिग के जरिये गरीबों में व्याप्त अशिक्षा के अभिशाप को मिटाने की ठान ली। मकसद को कामयाब बनाने के लिए बीएड में प्रवेश ले लिया। वह रोजाना ही स्कूटी से कॉलेज आती जाती थी। एक दिन बाइकर्स ने उसे ऐसी टक्कर मारी कि वह हमेशा के लिए चिरनिद्रा में सो गई। 
ज्योतिका की मौत हादसा या फिर कोई साजिश? यह तो पुलिस की तफ्तीश से ही साफ हो सकेगा। होनहार बेटी की मौत से पूरा परिवार गमजदा है। शहर के मुहल्ला दुर्गाप्रसाद में शनिदेव मंदिर के नजदीक रहने वाले सराफा कारोबारी विष्णु स्वरूप रावत के नौ पुत्रों और पांच पुत्रियों में ज्योतिका रावत सबसे छोटी होने की वजह से पूरे परिवार की बेहद लाडली थी। वह बचपन से ही कुशाग्र और पढ़ने लिखने में तेज थी। रामलुभाई साहनी राजकीय महाविद्यालय से एमकॉम किया था। 

ज्योतिका रावत ने पिता से वकालत की शिक्षा ग्रहण करने के बाद पीसीएस (जे) की तैयारी करने की इच्छा जताई थी। पिता ने वकालत के बजाय कोई दूसरा प्रोफेशन चुनने को कह दिया था, जिसके बाद ज्योतिका ने टीचिग करने की इच्छा जताई थी। ज्योतिका रावत को शहर के पुष्प इंस्टीट्यूट में बीएड में दाखिला दिला दिया गया था। 15 नवंबर को सुबह करीब सवा नौ बजे वह स्कूटी से कॉलेज जा रही थी, तभी कॉलेज गेट के सामने बाइक सवार दो युवकों ने जोरदार टक्कर मार दी थी। दिल्ली के सफदरगंज हॉस्पीटल में 28 दिसंबर की रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। ज्योतिका के भाई योगेश रावत की ओर से सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।