मोती की माला के नाम पर जमा कराई रकम, मोटी राशि दबाकर कंपनी में जड़ दिया ताला, दफ्तर बंद देख थाने पहुंचे लोग

कम समय में अधिक लाभ का लालच देकर निवेशकों से मोटी रकम ठगने का मामला सामने आया है। यह मामला आर्टिफिशियल गैलरी नाम की कंपनी से जुड़ा बताया जाता है। आरोप है कि कंपनी के लोग निवेशकों की रकम लेकर फरार हो गए हैं। कंपनी के ऑफिस में ताला लगा हुआ है और इसके कर्मचारियों के मोबाइल स्विच ऑफ या आउट ऑफ नेटवर्क बता रहे हैं। सिविल लाइन थाना क्षेत्र की मंदाकिनी विहार कॉलोनी गढ़यिा टोला में दलजीत सिंह के मकान एमआइजी 25 में आर्टिफिशियल गैलरी नाम की कंपनी का ऑफिस था। विगत बुधवार को इस ऑफिस में लोगों की आवाजाही बनी थी, लेकिन गुरुवार 9 जनवरी को इस ऑफिस का ताला नहीं खुला। काम के सिलसिले में ऑफिस पहुंचे लोगों ने जब ऑफिस के कर्मचारियों- अधिकारियों को फोन लगाया तो संपर्क स्थापित नहीं हुआ। जब उनके रिहायशी ठिकानों पर संपर्क किया गया तो वहां भी नहीं मिले। इसके बाद लोगों को संदेह हुआ कि कंपनी सबका पैसा लेकर भाग गई है और तब मामला थाने पहुंचा।

पहले विश्वास और फिर किया घात

बताया जा रहा कि यह कंपनी लोगों से पैसा लेती थी और उसके बदले उन्हें माला बनाने के लिए मोती देती थी। सौ मोतियों से एक माला तैयार होती थी। इस एक माला पर 10 रुपए बनवाई दी जाती थी। एक रुपए प्रति मोती के हिसाब से मोती दिया जाता था। यानी एक हजार रुपए में एक हजार मोती मिलते थे। एक हजार मोतियों से 10 मालाएं तैयार होती थी। 10 मालाओं पर 10 रुपए प्रत्येक की दर से सौ रुपए की आमदनी होती थी। इस फार्मूले पर काम करते हुए सबसे पहले कंपनी ने आम आवाम के बीच अपना विश्वास जमाया। जब कंपनी से लोग जुडऩे लगे तब कंपनी ने एक-दूसरे को जोडऩे वाला फंडा इस्तेमाल किया। 

नेटवर्क मार्केटिंग की तर्ज पर कंपनी ने अपने ग्राहकों और निवेशकों की लंबी चैन तैयार कर ली। निवेशकों ने न्यूनतम एक हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए और इससे अधिक तक की रकम जमा की थी। जिले के नागौद थाना क्षेत्र के ग्राम पोड़ी के रहने वाले संत कुमार कुशवाहा पुत्र हीरालाल कुशवाहा (37) ने बताया कि उनके गांव के रहने वाले विजय द्विवेदी (50) इस कंपनी में काम करते थे, उन्होंने कंपनी में निवेश करने पर बड़ा लाभ होने का आश्वासन देकर डेढ़ लाख रुपए कंपनी में जमा करवाए। उनके द्वारा कहा गया कि 10 हजार की पूंजी पर 14 हजार रुपए वापस मिलेंगे। 10 हजार लगाने पर 14 हज़ार मिलने की उम्मीद में उन्होंने विगत 10 दिसंबर 2019 को पहली बार 50 हजार रुपए, 11 दिसंबर को फिर 50 हजार रुपए और इसके बाद 30 हजार व 20 हजार रुपए दो बार में जमा किए। जब वे अपने द्वारा जमा किए गए डेढ़ लाख रुपए की रसीद लेने इस कंपनी के ऑफिस पहुंचे तो यहां ताला लटका मिला। कंपनी के अधिकारियों कर्मचारियों से संपर्क का प्रयास किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली। तब पता चला कि कंपनी लोगों का पैसा लेकर भाग गई है।