मकान के नाम पर मिला धोखा, 40 लाख डूबे आहत होकर युवक ने दे दिया जान

अमावां शहर में मकान खरीदने की चाहत में एक परिवार बर्बाद हो गया। प्रापर्टी डीलरों ने 39.60 लाख रुपये निगल लिए। उसकी दिन रात सोच करते-करते पत्नी ने साढ़े तीन महीने पहले जान दे दी थी। गुरुवार को घर के पालनहार ने भी सुसाइड कर ली। इस घटना ने परिवार के सपनों को रौंदा ही नहीं बल्कि, पूरा कुनबा तबाह हो गया है। बूढ़े माता-पिता का सहारा तो छिना साथ ही दो मासूम भी अनाथ हो गए। अमेठी जिले के मोहनगंज थाना क्षेत्र के पूरे दिक्खन मजरे पाकरगांव निवासी धर्मेंद्र सिंह (36) तीन भाईयों में सबसे छोटा था। वह मिल एरिया थाना क्षेत्र के रतापुर में गैस चूल्हे की मरम्मत का काम करता था। दुकान से कुछ दूरी पर किराए का मकान ले रखा था। 
जिसमें पिता राम बहादुर, मां शांती सिंह, बेटी खुशी (12) और बेटे मयंक (10) के साथ रहता था। युवक ने शहर के त्रिपुला में एक मकान खरीदने के लिए दो साल पहले गांव की जमीन बेच दी थी। मकान खरीदने के लिए 39 लाख 60 हजार रुपये भी दे दिए। लेकिन, फिर मकान मिला और न ही रुपये वापस दिए गए। उल्टे उसे धमकियां दी जा रहीं थीं। इसी अवसाद में बीती 15 अक्टूबर को युवक की पत्नी शिवानी ने खुदकशी कर ली थी। इसके बाद गुरुवार को युवक जहरीला पदार्थ खा लिया। इसका पता चला तो परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए। जहां देर शाम उसने दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर पुलिस ने मामले की छानबीन की। 

मृतक के परिवारीजनों को घर से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें उसने आत्महत्या के कारणों का जिक्र किया है। पुलिस के मुताबिक त्रिपुला निवासी विवेक विश्वकर्मा, राम कुमार और शिवाकांत विश्वकर्मा ने धर्मेंद्र के साथ महराजगंज रोड पर जर्सी फार्म के पास स्थित एक मकान का सौदा किया था। धर्मेंद्र से रुपये लेने के बाद भी मकान नहीं दिया जा रहा था। काफी दबाव बनाने पर उसे 30 लाख की चेक थमा दी गई थी। फिर यह चेक भी बाउंस हो गई। जिसका मुकदमा युवक ने लिखाया था। इसमें चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इंतजार है तो न्यायालय से मामले के निस्तारण का। इनकी भी सुनें