पिता के डांटने पर संन्यासी बनने हरिद्वार चल दिए दोनों भाई, जानिए कैसे पकड़ाए...

मासूम ज्ञानेंद्र और सहमू को क्या पता है कि परदेस जाकर उनको कहां शरण मिलेगी। उनके दिमांग में बस एक ही बात थी कि हरिद्वार जाकर संन्यासी बनेंगे। वहां बड़े होकर उच्च कोटि के संत बनकर नाम कमाएंगे। लेकिन जब बरेली जंक्शन पर दोनों मासूम हरिद्वार जाने को ट्रेन की जानकारी ले रहे थे, तभी आरपीएफ ने पकड़ लिया और चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया।
हरदोई में बेरीगंज थानाक्षेत्र के गांव टिमनाकला के रहने वाले भैइया लाल का बेटा ज्ञानेंद्र अभी 11 साल का है। पांचवी का छात्र है। उसका चचेरा भाई सहमू पुत्र गोपाली अभी चार साल का है। भैइया लाल ने गुरुवार को ज्ञानेंद्र और सहमू को पढ़ाई न करने पर डांटा फटकार लगा दी। भैइया लाल खेत पर चले गए, तभी ज्ञानेंद्र ने हरिद्वार जाने की योजना बना ली। स्कूल न जाकर बिना बताए ही ज्ञानेंद्र और मासूम सहमू अकेले ही घर से निकल लिए। किसी ट्रेन से बरेली आ गए। आधी रात को जंक्शन पर दोनों इधर-उधर भटक रहे थे। प्राइमरी स्कूल की ड्रेस देखकर यात्रियों को कुछ संदेह हुआ। ज्ञानेंद्र से पूछा कहा जाना है। उसने कहा, हरिद्वार जाने वाली ट्रेन कब आएगी। बच्चों को अकेला देखकर आरपीएफ को सूचना दी गई। 

प्लेटफॉर्म पर इंस्पेक्टर वीके सिसोदिया टीम के साथ गश्त कर रहे थे। यात्रियों ने दोनों को आरपीएफ के हवाले कर दिया। आरपीएफ ने बच्चों से पूछा अकेले घर से क्यों आए, तभी दोनों रोने लगे। कहा, उनके गांव का कोई हरिद्वार में रहता है। जो वहां पूजा पाठ करता है। सोचा, क्यों न हरिद्वार जाकर रहें, वहीं बड़े होकर संत बन जाएंगे। पिता ने डांटा तो घर छोड़कर दोनों हरिद्वार जा रहे थे। रेलवे चाइल्ड लाइन कोऑर्डीनेटर रमन का कहना है, दोनों बच्चे ज्ञानेंद्र और सहमू हरदोई के रहने वाले हैं। उनको घर पहुंचाने के लिए टीम रवाना की जाएगी।