पूरी संपत्ति अपनी डॉक्टर के नाम कर गया बुजुर्ग दंपती! जानिए पूरा मामला....

हैरान कर देने वाले एक मामले में एक बुजुर्ग दंपती ने अपनी सारी संपत्ति 5 साल से देखभाल कर रही डॉक्टर के नाम कर दी। 2014 में अपनी मौत से 5 साल पहले 87 साल के दिनशॉ गांधी ने वसीयत बनाई, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने ताजा फैसले में मान्य घोषित किया है। दिनशॉ सारी संपत्ति फिजिशन डॉ. वीणा पटेल के नाम कर गए हैं। वीना 2001 में गांधी परिवार की डॉक्टर बनीं। तारदेव में रहने वाले गांधी और उनकी होमई के कोई संतान नहीं थी। होमई की मौत भी 2006 में हो गई। गांधी के तीन बैंक अकाउंट और फिक्स डिपॉजिट थे। राज्यभर में संपत्ति थी। गांधी की मौत के बाद वीणा ने हाई कोर्ट में वसीयत की तामील के लिए अर्जी दी, लेकिन गांधी की एक पोती (रिश्तेदार की पोती) बख्तावर घडियाली ने इसे चुनौती दी।
बख्तावर ने दावा किया कि वसीयत फर्जी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस वक्त वसीयत बनाई गई गांधी बीमार थे। उन्होंने वसीयत में वीणा पटेल की हैंडराइटिंग और पटेल के दस्तखत पर सवाल उठाए। बख्तावर ने यह भी दावा किया कि गांधी का घर पुश्तैनी था और कोई उसे वसीयत में किसी को नहीं दे सकता था। वहीं, पटेल ने इस बात का फायदा उठाने की बात से साफ इनकार कर दिया कि उन्होंने गांधी दंपती के नि:संतान होने का फायदा उठाया या गांधी को वसीयत उनके नाम करने के लिए दबाव बनाया। 

जस्टिस एक मेनन ने बख्तावर के आरोपों को खारिज कर दिया और फैसला दिया कि वसीयत लिखते वक्त गांधी मानसिक रूप से स्वस्थ थे। कोर्ट ने डॉ. पटेल के बयान को मान लिया कि गांधी ने वसीयत में उनका नाम लिखा। उन्होंने यह भी दावा किया कि गांधी उस वक्त काफी जीवट थे और अक्सर बैंक, पारसी अगियारी, मंदिर और बाजार जाया करते थे। बख्तावर ने दावा किया कि अगर वे पटेल को बेटी समझते तो अंतिम संस्कार लैंडलॉर्ड न करता। 

कोर्ट ने कहा कि इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि दंपती पटेल को उनकी बेटी मानता था या नहीं लेकिन 'ऐसा हो भी सकता है क्योंकि डॉक्टर उनके साथ रुकती थीं और उनके लिए खाना भी भेजती थीं। जस्टिस मेनन ने कहा कि गांधी ने अंग्रेजी और गुजराती, दोनों भाषाओं में दस्तखत किए और अंगूठे का निशान भी लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि वसीयत दो गवाहों, जिमी और जेनोबिया की मौजूदगी में लिखी गई। गांधी की एक संपत्ति अभी भी विवादों में है। तारदेव के बाटलीवाला कंपाउंट में एक फ्लैट का कुछ मालिकाना हक जोरास्ट्रियन बिल्डिंग फंड ट्रस्ट के पास है। एक हाई कोर्ट ने पहले साफ किया था कि इसके लिए अलग से कार्रवाई होगी।