अस्पताल में बेबी किट्स देकर विदा की जा रही हैं नवजात

शेखपुरा जिला के अस्पतालों में जन्म ले रहीं नवजात बेटियों को बेबी किट्स देकर विदा किया जा रहा है। यह अनूठा प्रयोग डीएम की पहल पर शुरू किया गया है। पिछले महीने के अंत में मनाये गये बालिका दिवस सप्ताह तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत बेबी किट्स प्रदान करने का काम किया जा रहा है। जनसंपर्क पदाधिकारी ने बताया डीएम की पहल पर यह कार्यक्रम सदर अस्पताल सहित जिला के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चलाया जा रहा है। 
इससे बेटी को जन्म देने वाली मां तथा उनके घर वालों के बीच सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है। इस बेबी किट्स के तहत अस्पतालों में संस्थागत प्रसव के तहत जन्म लेने वाली बेटियों (बेबी ग‌र्ल्स) को अस्पताल से छुट्टी के दौरान बेबी किट्स दिया जा रहा है। इस बेबी किट्स में नवजात बेबी ग‌र्ल्स के लिए कपड़े, साबुन, पावडर तथा जरूरी दवाइयां भी शामिल हैं। अस्पताल से छुट्टी के पहले इन नवजातों को जरूरी टीकाकरण भी किया जा रहा है। इस तरह के नये प्रयोग तथा पहल से बेटी को जन्म देने वाली माताओं का भी परोक्ष रूप से स्वागत हो रहा है। इसका अच्छा तथा सकारात्मक संदेश भी समाज में जायेगा। श्रद्धा से मनाई गई संत रविदास की जयंती

रविवार को शेखपुरा में संत रविदास जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई। इसक आयोजन अखिल भारतीय रैदसिया समाज ने किया। जयंती कार्यक्रम गिरिहिडा स्थित संत रविदास मंदिर में हुआ। इसकी अध्यक्षता रैदसिया समाज के जिलाध्यक्ष अभिनंदन कुमार उर्फ मारकुस ने की।
जयंती के अवसर पर भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ तथा सामूहिक पूजा-पाठ भी की गई। बाद में प्रसाद वितरण भी किया गया। इस मौके पर लोगों ने संत रविदास को सामाजिक न्याय का अगुवा बताया। 

लोगों ने कहा आज से छह सौ साल पहले संत रविदास जी ने सामाजिक न्याय का संदेश दिया था। छह सौ साल पहले दिये उनके संदेश आज पूरी तरह प्रासंगिक साबित हो रहे है। जयंती समारोह में जुटे लोगों ने कहा संत रविदास ने निचले तथा तबके तथा कमजोर वर्ग में शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर •ाोर दिया था। कहा शिक्षा के बगैर सामाजिक अंधविश्वास को तोड़ना मुश्किल है। जयंती समारोह में लोगों ने आगे बढ़ने के लिए शिक्षा को अपनाने के साथ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी आवाज उठाने पर बल दिया। इसमें राजेंद्र दास,उदय कुमार मोनू, शंकर दास,रामप्रसाद दास,रामाश्रय यादव, सुखदेव प्रसाद, महेंद्र दास, चंदन कुमार आदि प्रमुख लोगों के बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए।