4 मासूमों के साथ 100 किमी तक पैदल चली महिला, रोते हुए बोली- साहब कोई साधन दिला दीजिए, जल्दी से गांव पहुंचना हैं

साहब कोई साधन दिला दीजिए। यह कहते हुए राहगीर महिला फफक कर रोने लगी। कहा कि, अपने चारों मासूम बच्चों को गोद में लेकर सौ किमी चलकर गांव जा रहे हैं। अब पैरों के साथ साथ शरीर ने भी साथ देना छोड दिया है। कोई साधन मिल जाए जिससे जल्दी गांव मिल जाए।
बांदा जिले के पपरेंदा गांव से दंपति अपने चारों मासूम बच्चों के साथ कुरारा के डामर गांव के लिए निकल पड़े। उधर हाईवे में महिला अपने दोनों गोद में लेकर चलती हुई और उसके आगे पति दो बच्चों का हांथ पकड़ कर चलते नजर आए।

कुरारा क्षेत्र के डामर गांव निवासी शिव देवी अपने पति रोहित कुमार व चार मासूम बच्चों के साथ पिछले रविवार को बांदा के पपरेंदा गांव से निकले थे। मंगलवार की दोपहर हाईवे में शहर के पास दोनों पति पत्नी अपने दो दो बच्चों को गोद में लिए जा रहे थे। जब उनसे पूछा कि आप लोग कहां से आए हैं और कहां जाएंगे। तब महिला ने रोते हुए कहा कि साहब कोई साधन दिला दीजिए।

पूछने पर बताया कि हम लोग बांदा में मजदूरी करते हैं। मगर कोरोना वायरस से लॉकडाउन के कारण काम धंधा बंद हो गया। कहा कि गांव पहुंच कर खेती कटाई का कार्य कर पेट तो भर लेंगे। बताया कि वह पिछले रविवार की सुबह बांदा से चले थे। मंगलवार की शाम तक अपने घर पहुंच जाएगे। महिला ने मुर्झाये चेहरे के साथ कहा कि साहब अपना शरीर तो पैदल चला नहीं जा रहा है। ऐसे में साधन न मिलने के कारण अपने चारों बच्चों को गोद में लेकर चलना परेशानी होती है। मगर कोई साधन न मिलने पर दंपति परिवार बच्चों को लेकर पैदल गांव की ओर निकल गया।

पीएचसी बंद होने से मरीजों का नहीं हो रहा इलाज

बिवांर कस्बे की पीएचसी के बंद होने से मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। लॉक डाउन के चलते ओपीडी बंदकर इमरजेंसी के खोले जाने का आदेश है। दो दिन से चिकित्सालय में कर्मी नहीं रह रहे हैं। चिकित्सालय के चिकित्सक डॉ. एसके सिंह ने बताया कि पीएचसी बंद रखने के साथ सीएचसी में रहने के निर्देश हैं। इमरजेंसी मरीज 102 नंबर फोन कर वाहन को बुला सकते हैं। जिनका उपचार सदर अस्पताल में किया जाएगा।