दिल्ली में कोरोना से ठीक हुए पहले मरीज की कहानी, बताया कैसे महसूस होता है बीमारी और इलाज़

दिल्ली में कोरोना वायरस का जो पहला केस आया था वो मयूर विहार के रोहित दत्ता का था। रोहित दत्ता इटली की यात्रा से दिल्ली लौटे थे और वो दिल्ली में कोरोना वायरस के पहले मरीज थे। 45 साल के रोहित दत्ता अब एकदम सही हो गए हैं और उनको अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। रोहित दत्ता ने एनबीटी से बात करते हुए बताया कि किस तरह से उनका इलाज किया गया। रोहित दत्ता को शनिवार को सफदरजंग हॉस्पिटल से छुट्टी दी गई है और वो इस संक्रमण से पूरी तरह से सही हो गए हैं। रोहित को अस्पताल में आइसोलेशन वॉर्ड में रखा गया था जो कि किसी भी प्राइवेट वॉर्ड के वीआईपी रूम से कम नहीं था। उन्हें अस्पताल में अच्छा खाना दिया जा रहा था और वो लगातार अपने परिवार वालों से बात कर पा रहे थे। इलाज के दौरान उन्होंने अपने रूम में बैठकर दो मूवी भी देखी और किताब भी पढ़ी।

डॉ. हर्ष वर्धन ने किया कॉल
रोहित के अनुसार जब उनका इलाज अस्पताल में चल रहा था तो उनकी सेहत पूछने के लिए खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन की विडियो कॉल आई थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने विडियो कॉल कर उन्हें होली की शुभकामनाएं भी दी। कई देर तक डॉ. हर्ष वर्धन ने रोहित से बात की और उनको हौंसला दिया की वो जल्द ही सही हो जाएंगे। रोहित ने करीब 10-12 मिनट डॉ. हर्ष वर्धन से बता की और डॉ. हर्ष वर्धन ने उन्हें बताया कि प्रधानमंत्री भी उनका हालचाल जानना चाहते हैं। मोदी ने भी उनको जल्द स्वस्थ होने की कामना दी है। रोहित ने कहा कि सबको लग रहा था कि पता नहीं मैं सही हो पाउंगा की नहीं। लेकिन डॉक्टरों को पूरा विश्वास था कि मुझे कुछ नहीं होगा। हर समय मेरी कंडीशन को बारीकी से मॉनिटर किया जा रहा था।
इलाज के दौरान 9 और 11 मार्च को उनके दोबारा सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए और उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। जिसके बाद उन्हें 14 तारीख को छुट्टी दे दी गई। हालांकि छुट्टी देने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें 14 दिन घर में सबसे अलग रहने को कहा और अब वो इस वायरस से पुरी तरह से मुक्त हो गए हैं। रोहित ने सरकार द्वारा कोरोना को नियंत्रण करने के जो प्रयास किए जा रहे हैं उनकी तारीफ की है और लोगों से अपील की है कि वो डरें नहीं और घर में बंद होकर न बैठें। पूरी सावधानी बरतें और कोरोना के लक्षण नजर आते ही अस्पताल जाकर जांच कराएं। रोहित दत्ता के अनुसार आरएमएल हॉस्पिटल में कोरोना के संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए अच्छे इंतजाम किए गए हैं और चेकइन काउंटर बना हुआ है। वहां जाकर एक फॉर्म भरना होता है और उसके बाद डॉक्टर आपकी जांच करता है।

इस तरह से लिया जाता है सैंपल
कोरोना वायरस की जांच केवल नाक और गले का स्वैब के जरिए की जाती है। कई लोगों को ऐसा लगता है कि सैंपल देते समय उनका खून निकाला जाता है। जो कि गलत जानकारी है। इस वायरस का टेस्ट आसान है और सैंपल देते समय किसी भी तरह का दर्द नहीं होता है। रोहित के मुताबिक अगर सही दवाई और डॉक्टर के सुपरविजन मिलने पर ही इस बीमारी से बचा जा सकता है।