22 साल बाद बनीं मां, 18 दिन के बच्चों को छोड़ ड्यूटी पर डॉक्टर, 8 दिन से नहीं गई घर

कोरोना काल (corona crisis) में फ्रंटलाइन वॉरियर्स (front line corona warriors) के रूप में काम कर रहे डॉक्टर (doctor became a mother ) लोगों की सेवा को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं। होशंगाबाद जिले के बाबई में तैनात ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (block medical officer) शोभना चौकसे 22 साल बाद 26 मार्च को मां (twin child) बनी हैं। जुड़वा बच्चों को घर छोड़ वह लगातार ड्यूटी कर रही हैं।
कोरोना काल में कोरोना वॉरियर्स ने परिवार से पहले अपने कर्म का फर्ज निभा रहे हैं। मजबूरियों की दीवार को तोड़ हमारे कोरोना कर्मवीर दिन-रात ड्यूटी में लगे हैं। मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में पदस्थापित ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर की कहानी जान दिल गदगद हो जाएगा। शादी के 22 साल बाद जुड़वा बच्चों की मां बनी डॉक्टर 10 दिन बाद ही उन्हें छोड़कर ड्यूटी ज्वाइन कर ली।

होशंगाबाद जिले के बाबई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात बीएमओ शोभना चौकसे कोरोना ड्यूटी की वजह से 8 दिन से अपनी घर नहीं गई हैं। वो भी तब, जब वह 26 मार्च को सेरोगेसी से जुड़वा बच्चों की मां बनी हैं। बच्चे अभी 18 दिन के ही हैं। जन्म के 10 दिन बाद ही डॉक्टर शोभना बच्चों को भैया-भाभी के हवाले कर ड्यूटी ज्वाइन कर लीं।

शादी के 22 साल बाद मां बनी डॉक्टर

डॉक्टर शोभना चौकसे शादी के 22 साल बाद मां बनी हैं। कोरोना की वजह से वह मातृत्व सुख का भी लाभ नहीं उठा पाईं। इस दौरान में जब बच्चों को उनकी जरूरत है तो वह लोगों की सेवा करने के लिए अस्पताल चली गई हैं। होशंगाबाद से वह भैया-भाभी को बुलाकर बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी दे दी है।

होशंगाबाद में 22 साल बाद मां बनी ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर अपने 18 दिन के बच्चों को घर पर छोड़कर ड्यूटी में लगीं।

वीडियो कॉल से बच्चों को दुलार
कोरोना संक्रमण घर तक न पहुंचे, इसलिए वह ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद घर भी नहीं गई हैं। अस्पताल के क्वार्टर में ही वह रात गुजराती हैं। सुबह से मरीजों की भीड़ अस्पताल में उमड़ने लगती है और डॉक्टर शोभना चौकसे इलाज में लग जाती हैं। खाली होते ही घर पर फोन कर बच्चों का हाल ले लेती हैं। उन्होंने बताया कि वह 8-10 दिन से घर नहीं गई हैं। वीडियो कॉल के जरिए बच्चों को दुलार लेती हैं।

बच्चों से दूर रहने के सवाल पर डॉक्टर शोभना चौकसे ने कहा कि कोरोना महामारी के इस दौर में मॉरल ड्यूटी यह है कि हम पहले समाज को देखें। मैं 24 घंटे मुख्यालय पर रहकर ड्यूटी कर रही हूं। भैया-भाभी बच्चों का देखभाल कर रही हैं। बच्चों की याद काफी आती हैं, क्योंकि मैं 22 साल के बाद मां बनी हूं। याद आने पर वीडियो कॉल कर लेती हूं। 8 दिनों से बच्चों के पास नहीं गई हूं। बच्चों के नाम अंश और वंश रखे हैं।