लोन की किस्तें चुकाने पर मिल सकती है 6 महीने के लिए छूट, SBI के चेयरमैन बोले, सरकार से मांग करेंगे बैंक

भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार के मुताबिक बैंकों की ओर से लोन की किस्तों पर अदायगी की छूट की समयसीमा बढ़ाने की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि इंडियन बैंक्स एसोसिशन की ओर से सरकार से इस संबंध में मांग की जाएगी।

लोन की किस्तों पर बढ़ सकती है छूट की सीमा
आरबीआई के आदेश के बाद फिलहाल बैंकों की ओर से तीन महीने के लिए सभी तरह के टर्म लोन्स की किस्तों की अदायगी पर छूट दी गई है। यह मियाद मई में समाप्त हो रही है। हालांकि कोरोना के संकट के चलते इस डेडलाइन को आगे बढ़ाया जा सकता है। भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार के मुताबिक बैंकों की ओर से लोन की किस्तों पर अदायगी की छूट की समयसीमा बढ़ाने की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि इंडियन बैंक्स एसोसिशन की ओर से सरकार से इस संबंध में मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि किस्तों में अदायगी की छूट को तीन महीने की बजाय 6 महीने तक के लिए बढ़ाने की जरूरत है। कोरोना वायरस के संकट से निपटने के लिए जारी लॉकडाउन की अवधि को और बढ़ाए जाने से बैंक लोन चुकाने में लोगों को समस्या पैदा हो सकती है।

एक वेबिनार को संबोधित करते हुए एसबीआई चीफ ने कहा कि सरकार को कॉरपोरेट लोन पर गारंटी देनी चाहिए ताकि बैंकों की ओर से कर्ज दिए जा सकें। उन्होंने कहा कि कोरोना के संकट से निपटने में बैंकों की ओर से दिए जाने वाले कर्ज की भूमिका अहम हो सकती है। रजनीश कुमार ने कहा कि अर्थव्यवस्था को कई स्तरों पर सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो समग्र स्तर पर अर्थव्यवस्था को सहयोग की जरूरत है। इसके बाद ट्रांसपोर्ट, होटल, रेस्तरां एवं अन्य सेक्टर्स को चुन-चुनकर मदद किए जाने की जरूरत है।

एसबीआई के मुखिया ने कहा कि मौजूदा संकट में सरकारी बैंकों और देश के समूचे बैंकिंग सिस्टम की भूमिका अहम हो सकती है। बता दें कि कोरोना संकट से निपटने के लिए हुए लॉकडाउन के चलते ज्यादातर कंपनियां संकट के दौर में गुजर रही हैं और उनके पास नकदी की कमी देखने को मिल रही है। ऐसे में भविष्य में कॉरपोरेट लोन की जरूरत बढ़ सकती है। इसके अलावा मौजूदा लोन पर कुछ छूट भी दिए जाने की जरूरत है ताकि डिफॉल्ट की स्थितियों से बचा जा सके।

औद्योगिक संगठनों की मांग, लोन की बढ़े अवधि: गौरतलब है कि एसोचैम और फिक्की जैसे औद्य़ोगिक संस्थानों ने सरकार और बैंकों से मांग की है कि मौजूदा कर्जों का पुनर्गठन किया जाए और रीपेमेंट पीरियड को बढ़ाया जाए। इसके अलावा औद्योगिक संगठनों ने नए लोन जारी करने की भी मांग की है ताकि ऑपरेशंस को दोबारा से चालू किया जा सके।