कोरोना: दोगुने दाम में बिक रहे वेंटिलेटर, बैन के बावजूद खरीदकर घरों में स्टॉक कर रहे हैं लोग

कोरोना वायरस के गंभीर खतरे को देखते हुए देश में लॉकडाउन लागू कर दिया गया है. आवश्यक चीजों को छोड़कर सारी दुकानें बंद हैं. प्रशासन लगातार लोगों से जमाखोरी न करने की अपील कर रहा है. सरकार का दावा है कि किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी जाएगी. लेकिन एक ऐसी आवश्यक चीज है जो जरूरत के हिसाब से काफी कम है. वेंटिलेटर. सरकार लगातार इसकी संख्या बढ़ाने को लेकर प्रयासरत है. वेंटिलेटर गंभीर रूप से बीमार लोगों के इलाज में उपयोगी है. यह ऐसी डिवाइस है जो फेफड़ों में हवा और ऑक्सीजन देती है. कोरोना वायरस सीधा फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है. ऐसे में वेंटिलेटर जान बचाने का काम करता है. अभी वेंटिलेटर काफी डिमांड में हैं. इसी डिमांड का फायदा उठाकर डिस्ट्रीब्यूटर्स इसकी कालाबाजारी पर उतर आए हैं.

कोरोना वायरस के चलते वेंटीलेटर्स काफी डिमांड में है.
दोगुने दाम पर बिक रहे वेंटिलेटर
कमलेश मौर्या दिल्ली के मेडिकेम एंटरप्राइजेज के हेड हैं. इंडिया टुडे के अंडरकवर रिपोर्टर से बातचीत के दौरान उन्होंने कबूला कि डिमांड बहुत ज्यादा है जिसकी वजह से उनके जैसे डिस्ट्रीब्यूटर्स पोर्टेबल रेस्पिरेटर्स के दाम बढ़ा रहे हैं. कमलेश ने बताया,

“मांग ज्यादा है. वेंटिलेटर्स उपलब्ध नहीं है. अगर आप अलग-अलग ब्रैंड्स खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अधिक (सामान्य कीमत से) पैसा देना होगा. अगर डीलरशिप से प्राइस कोटेशन के लिए मैं कहूं तो ये छह लाख की रेंज में होगा.”

मौर्या ने माना कि सामान्य स्थिति में इस डिवाइस की कीमत अमूमन 3 लाख के लगभग होती है.

मौर्या ने दावा किया कि कोरोना वायरस की आंशका से जो आपाधापी मची है, उसकी वजह से कीमतें बीते एक हफ्ते में बढ़ी हैं. इसके पीछे कोई मेडिकल इमरजेंसी जैसी बात नहीं है. मौर्या ने कहा, कम्पनियों के पास अब स्टॉक खत्म हो गया है. लोग मशीन (मरम्मत की हुई हर मशीन) के लिए 6 से 7 लाख रुपये देने के लिए तैयार हैं. पैसे से जान ज्यादा कीमती है. पहले बिल्कुल नया पीस 7 लाख रुपये का होता था.

वेंटिलेटर खरीद कर रख रहे हाउसिंग सोसायटी के लोग
इसी तरह दिल्ली स्थित तीर्थंकर महावीर ट्रेडर्स के नमन जैन ने खुलासा किया कि किस तरह कुछ टॉप रैंक वाले अधिकारी और हाउसिंग सोसाइटीज पोर्टेबल वेंटिलेटर्स का स्टॉक जमा कर रही हैं. इंडिया टुडे के अंडरकवर रिपोर्टर को नमन जैन ने बताया कि एक ‘असिस्टेंट कमिश्नर, पुलिस’ ने हाल में प्रीमियम दाम पर तीन मशीनें खरीदी हैं. रिपोर्टर और नमन जैन के बीच की बातचीत पढ़िए-

रिपोर्टर- इसका क्या मतलब है कि उन्हें इसकी कोई तुरंत आवश्यकता नहीं थी इसके बावजूद उन्होंने वेंटिलेटर्स खरीदे?

जैन- तुरंत आवश्यकता जैसा कुछ नहीं. उन्होंने बस सुरक्षा के मकसद से मशीन खरीदी हैं. हम वेंडर्स के पास करीब 6,000 वेंटिलेटर्स थे,. इनमें से 700-740 ट्राइलॉजी (पोर्टेबल फिलिप्स वेंटिलेटर्स) थे. अब केवल 11 से 12 बचे हैं.

जैन ने बताया कि हाउसिंग सोसाइटी में लोग आपस में पैसा इकट्ठा कर डिवाइस खरीद रहे हैं. जैन के मुताबिक, अधिकतर ऐसी सोसाइटी नोएडा में हैं. 100 मकान मिलकर 10 डिवाइस खरीद रहे हैं. एक नई BiPap मशीन (वेंटिलेटर की एक किस्म) अमूमन 2.25 लाख रुपए की आती है. जैन ने बताया कि अब पुरानी डिवाइस ही डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा की बिक रही है. जो कि पहले 60-85 हजार तक में मिल जाती थी.

बैन के बावजूद बेचने को तैयार
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में अंडर कवर रिपोर्टर्स ने वाईएमजी हेल्थकेयर से जुडे गजेंद्र सिंह का रुख किया. गजेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए निजी संस्थाओं या लोगों को वेंटिलेटर्स बेचने पर रोक लगा रखी है. और इसके बावजूद उन्होंने प्रीमियम दाम पर डिवाइस उपलब्ध कराने की पेशकश की.

गजेंद्र सिंह ने कहा, “मेरे पास 20 (वेंटिलेटर्स) मॉनीटर्स थे. मैंने उनके लिए पूछताछ करने वाले अपने मौजूदा ग्राहकों को तरजीह दी. ये डिमांड और सप्लाई का खेल है. ज्यादा डिमांड और कम सप्लाई पर दाम बढ़ते हैं.”

गजेंद्र सिंह ने बताया वेंटिलेटर्स को बनाने और बेचने वाली सारी कंपनियों से कहा गया है कि वे सिर्फ सरकार को आपूर्ति करें.

“अगर कोरोना वायरस फैलता है तो वेंटिलेटर्स की डिमांड दो लाख तक बढ़ जाएगी. ये सरकार के लिए युद्ध जैसी स्थिति है. अगर उन्हें पता चलता है कि मेरे पास स्टॉक है और मैंने बेचने की बात की है तो वो मुझे किसी को भी इन्हें बेचने की इजाज़त नहीं देंगे. इन्हें निजी संस्थान या व्यक्ति को नहीं बेचा जा सकता. गाजियाबाद प्रशासन ने मुझसे कहा है कि सारी आपूर्ति उसे ही मिलनी चाहिए.”

इसके बावजूद गजेंद्र ने अंडरकवर रिपोर्टर को वेंटिलेटर उपलब्ध करा देने का दावा किया. उसने कहा कि अगर मैं बेचना नहीं चाहता तो आपको बुलाता ही नहीं.

‘जमाखोरी करना गलत नहीं’

नजफगढ़ स्थित यूएम हेल्थकेयर इंडिया के डायरेक्टर मनीष धनखड़ ने अंडरकवर रिपोर्टर को भविष्य में घर पर इस्तेमाल के लिए नए वेंटिलेटर्स की सप्लाई का भरोसा दिलाया.

धनखड़- लोग हालात का फायदा उठाते हैं. सरकार समर्थन मांग रही है. लेकिन कल सरकार क्या समर्थन देने के लिए आगे आएगी?

रिपोर्टर- लेकिन क्या निजी इस्तेमाल के लिए वेंटिलेटर्स की जमाखोरी गलत नहीं है?

धनखड़- नहीं, आपको पहले खुद को बचाना चाहिए. कोई सरकार आपकी मदद नहीं करेगी.

बिना किसी मेडिकल जरूरत के वेंटिलेटर की खरीद को जायज बताते हुए धनखड़ ने पांच पोर्टेबल यूनिट्स के लिए 3 लाख 92 हजार रुपए की मांग की.


मारुति सुजुकी वेंटीलेटर बनाने पर काम कर रही है.

एक मोटे अनुमान के मुताबिक, भारत में फिलहाल 40,000 वेंटिलेटर्स उपलब्ध हैं. केंद्र सरकार ने इसी महीने ICU मेडिकल डिवाइस के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है. इनमें भारी मांग वाले वेंटिलेटर्स और सैनिटाइजर्स शामिल हैं. अभी तक भारत अधिकतर वेंटिलेटर विदेशों से ही मंगाता रहा है. लेकिन कोरोना की वजह से आयात लगभग बंद हो चुका है. ऐसे में सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों से वेंटिलेटर बनाने की अपील की है. टाटा और महिंद्रा ने DRDO के साथ मिलकर वेंटिलेटर बनाने का काम शुरू भी कर दिया है. इसके अलावा मारुति सुजुकी भी AgVA Healthcare के साथ मिलकर वेंटिलेटर बनाने का काम शुरू कर चुकी है.