तुर्कमेनिस्तान ने 'कोरोना वायरस' शब्द पर बैन लगाया, मास्क पहनने वालों को जेल में डालने का आदेश

मध्य एशियाई देश तुर्कमेनिस्तान में अधिकारी 'कोरोना वायरस' की जगह 'सांस की बीमारी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं
तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति गुरबांगुली बेयरडेमुकामेडॉव इस समय दुनिया भर में लोगों को कोरोना वायरस की ज्यादा से ज्यादा जानकारी दी जा रही जिससे कि वे इस बीमारी से अपना बचाव कर सकें. लेकिन मध्य एशियाई देश तुर्कमेनिस्तान ने अपने यहां इस शब्द के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है.

तुर्कमेनिस्तान की स्वतंत्र न्यूज़ एजेंसी ‘तुर्कमेनिस्तान क्रॉनिकल’ के मुताबिक सरकार की तरफ से मीडिया, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों से कहा गया है कि कोरोना वायरस शब्द का इस्तेमाल न किया जाए. सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों में भी इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. बताते हैं कि ‘कोरोना वायरस’ शब्द की जगह ‘बीमारी’ या ‘सांस की बीमारी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

यूरोपीय न्यूज़ एजेंसी ‘रेडियो फ्री यूरोप’ के मुताबिक तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अशगबत में जो लोग सड़कों पर कोरोना वायरस को लेकर बातें करेंगे या चेहरे पर मास्क लगाएंगे, उन्हें पुलिस गिरफ्तार कर सकती है. खबरों के मुताबिक पुलिस अधिकारी सड़कों पर सादे कपड़ों में यह देखने के लिए घूमते हैं कि कौन कोरोना वायरस को लेकर बातचीत कर रहा है.

तुर्कमेनिस्तान की सरकार ने अपने यहां कोरोना का कोई भी पीड़ित होने से इनकार किया है. सरकार इस वायरस की रोकथाम के लिए अहम कदम भी उठा रही है. रेलवे और बस स्टेशन पर तापमान जांचने से लेकर भीड़-भाड़ वाली जगहों की साफ-सफाई की जा रही है. देश में जारी नागरिक आंदोलनों पर भी रोक लगी हुई है. इसके अलावा सरकार ने अफगानिस्तान की सीमा से सटे गांवों में भी नागरिकों के जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है.

यही नहीं, रूढ़िवादी सोच वाले तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति गुरबांगुली बेयरडेमुकामेडॉव ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए एक अजीबोगरीब आदेश जारी किया है. उन्होंने देश के सभी सार्वजनिक स्थलों पर ‘हरमाला’ नामक पारंपरिक पौधा लगाने के लिए कहा है. उनका मानना है कि यह पौधा बीमारियों का प्रसार रोकने में सहायक है.