कोरोनाकाल में भक्त कर रहे आसाराम की रिहाई की मांग, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

देश भर में कोरोना वायरस तेजी से फैल रहा है। अब तक 1071 लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और 29 लोगों की मौत भी हो चुकी है। इसी बीच जेलों में बंद कुछ कैदी भी रिहा किए जा रहे हैं, ताकि जेलों में भीड़ कम हो सके और कोरोना वायरस का खतरा भी कम हो सके। इसी बीच सोशल मीडिया पर #Release AsharamjiBapu OnParole ट्रेंड करना शुरू हो गया है। इस हैशटैग के साथ आसाराम के भक्त कह रहे हैं कि आसाराम को भी रिहा करना चाहिए। आइए जानते हैं आसाराम की रिहाई के लिए ये भक्त क्या-क्या तर्क दे रहे हैं।
एक यूजर ने तर्क दिया है कि कोरोना वायरस का सबसे अधिक असर 60 साल से अधिक की उम्र के लोगों यानी बूढ़ों पर होता है। उसका कहना है कि आसाराम की उम्र 85 साल है और ऐसे में हम मांग करते हैं कि आसाराम को पैरोल पर जेल से छुट्टी दी जाए। एक अन्य यूजर ने तो धमकाने के अंदाज में लिखा है कि सिर्फ अंडर ट्रायल या 7 साल से कम की सजा काट रहे कैदी ही नहीं, बल्कि 60 साल की उम्र से अधिक के सभी कैदियों को भी रिहा किया जाना चाहिए, वरना कोविड-19 की वजह से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ेगी और इसके लिए सरकार ही जिम्मेदार होगी। एक ट्विटर यूजर ने तो ये तक कह दिया कि हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि आसाराम एक स्वघोषित संत हैं और उनके पास कई उपाय हैं। हमें उनसे कोरोना से लड़ने उपाय जानने चाहिए।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश?

कोरोना वायरस के फैलने के डर से सुप्रीम कोर्ट ने ही जेलों को आदेश दिया था कि कुछ कैदियों को छोड़ा जाए। आदेश के मुताबिक, सात साल तक की जेल की सजा काट रहे कैदियों को पैरोल या अंतरिम जमानत दी जा सकती थी। सुप्रीम कोर्ट ने 23 मार्च को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे कोरोना महामारी के मद्देनजर जेलों में बंद सात साल तक जेल की सजा पाने वाले कैदियों के लिए पैरोल या अंतरिम जमानत पर रिहा करने पर विचार करने के लिए उच्च स्तरीय समितियों का गठन करें। इसी के तहत अब रिहाइयां की जा रही हैं। तो क्या नियम के मुताबिक आसाराम को छुट्टी मिलेगी?

सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ ये कहा है कि 7 साल से कम की सजा काट रहे लोगों को पैरोल या अंतरिम जमानत दी जाए। इसके लिए उसने एक समिति भी बनाने का निर्देश दिया था। यह समिति इसी बात का फैसला करने के लिए बनाई गई है कि किसे रिहा किया जाना चाहिए और किसे नहीं। अगर समिति को लगता है कि वाकई आसाराम को रिहा किया जाना चाहिए और उसके रिहा होने से कानून व्यवस्था नहीं बिगड़ेगी, तो आसाराम रिहा हो सकते हैं, लेकिन अगर समिति को जरा भी संदेह होता है तो वह एक कैदी की जान बचाने के लिए हजारों बेकसूर नागरिकों को मौत के मुंह में नहीं धकेलेंगे। हां, अगर बहुत जरूरी लगा तो आसारम को एक अलग जेल में आइसोलेट कर के रखा जा सकता है।