इस तरह खुद भी शक के घेरे में आ गया है कोरोना का ये हीरो!

कोरोना पीड़ित युवक के चेकअप के लिए डॉक्टरों की टीम को हर आधे घंटे बाद फोन करने वाले और उसे गांव के बाहर ढाई घंटे तक रोककर रखने वाले पनियाला गांव निवासी मोमिन लाख कोशिश के बावजूद उसके संपर्क में आने से खुद को नहीं बचा सके। उन्हें परिवार समेत कलियर में क्वारंटीन किया गया है। पेशे से राजमिस्त्री मोमिन अंसारी ने गांव में संक्रमण फैलने से रोकने को काफी कुछ किया। 
फोन पर मीडिया से बातचीत में मोमिन बताते हैं कि 31 मार्च को जब युवक के नारसन बॉर्डर पर पहुंचने की सूचना मिली तो उन्होंने ग्राम प्रधान को सलाह दी कि उसे गांव के बाहर ही रोककर डॉक्टरों से जांच कराई जाएगी। सुबह 7.45 बजे फोन आया कि युवक बॉर्डर के समीप है, लेकिन जो गाड़ी उसे लाई है, वह आगे नहीं जाएगी। इसके बाद युवक के घर आया मलकपुर निवासी उसके बुआ के बेटे अपनी कार से उसके भाई को लेकर निकल गए। थोड़ी ही देर में मोमिन भी गांव के बाहर हाईवे की तरफ पहुंचे और 8.30 बजे स्वास्थ्य विभाग की टीम को फोन किया। 

इसी युवक को लेकर कार आती दिखी तो मोमिन ने कार सवार उसके भाई फोन किया और कुछ दूरी पर ही कार रोकने को कहा। दस बजे तक भी स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची तो उन्होंने एलआईयू प्रभारी प्रदीप नेगी से संपर्क किया। प्रदीप नेगी ने अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद भी मोमिन लगातार विभागीय टीम को फोन करते रहे। मोमिन के अनुसार करीब 11 बजे टीम पहुंची और चेकअप करने के बाद घर में अलग रहने की हिदायत दी। 

जांच के दौरान मोमिन ने युवक और कार में उसके साथ बैठे लोगों के साथ पांच मीटर की दूरी बनाए रखी। युवक के घर पहुंचने के करीब 35 मिनट बाद उनके पास विभागीय टीम का फोन आया। बताया गया कि एंबुलेंस भेज रहे हैं और युवक को भर्ती करना पड़ेगा। दस मिनट बाद टीम पहुंच गई, लेकिन यहीं मोमिन से चूक हो गई। वह टीम आने की जानकारी देने उसके घर में चले गए। बस फिर टीम उन्हें भी साथ ले आई। अब मोमिन को अपनी जांच रिपोर्ट का इंतजार है।