कोरोना के मरीज़ों के लिए महिंद्रा ने जो सस्ता वेंटिलेटर बनाया, उसका डिज़ाइन चोरी किया हुआ है!

महिंद्रा कंपनी. बहुत कुछ बनाती है. और इस बार बनाया है कृत्रिम रूप से सांस देने की मशीन. आम भाषा में इसे छोटा वेंटिलेटर भी कहते हैं. लेकिन चंडीगढ़ के एक डॉक्टर ने बताया है कि महिंद्रा ने उनका डिज़ाइन चुरा लिया, और उन्हें क्रेडिट नहीं दिया.

क्या था मामला?
पवन गोइनका. महिंद्रा एंड महिंद्रा कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर. उन्होंने 30 मार्च को एक वीडियो ट्वीट किया. कहा कि कोरोना के फैलते संक्रमण के बीच महिंद्रा ने सस्ता सांस लेने का यंत्र बना लिया है. इस वीडियो में मरीज़ों को कृत्रिम रूप से सांस देने की मशीन थी. काम कर रही थी.

बहुत हल्ला उड़ा. ख़बर चली. इसके बाद हिमाचल प्रदेश के रहने वाले डॉ. राजीव चौहान प्रकाश में आए. राजीव चौहान फ़िलहाल PGI चंडीगढ़ में न्यूरो-एनेस्थीसिया के डॉक्टर हैं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि महिंद्रा ने उनका डिज़ाइन चोरी कर लिया है. दी लल्लनटॉप से बातचीत में राजीव चौहान ने बताया,

“मै लगभग एक से डेढ़ साल से एक एम्बु बैग (जिसे हाथों से पम्प करके मरीजों को कृत्रिम रूप से सांसद दी जाती है) के मॉडल पर काम कर रहा था, जिसमें मेरे साथ इंडीयन इन्स्टिटूट ऑफ़ साइन्स के दो छात्र काम कर रहे थे. हमारी कोशिश थी कि हम ऐसा डिज़ाइन तैयार करें, जिससे इसे हाथों से पम्प न करना पड़े. और उसका दाम भी कम हो.”

अपने सस्ते वेंटिलेटर के डिज़ाइन के साथ राजीव चौहान.

राजीव चौहान आगे कहते हैं कि साल 2019 में उनकी टीम ने इस ऑटमैटिक एम्बु बैग का पहला वर्किंग मॉडल तैयार कर लिया. उनकी इस उपलब्धि को बाक़ायदा अख़बारों में जगह भी मिली. 22 दिसम्बर 2019 को राजीव चौहान ने इंडियन पेटेंट अथॉरिटी में आवेदन नम्बर : 201911053339 से अपने डिज़ाइन के पेटेंट सर्टिफ़िकेट के लिए भी अप्लाई किया.

राजीव चौहान की टीम को मिला पेटेंट का सर्टिफ़िकेट.
इसके कुछ दिनों बाद राजीव चौहान को पेटेंट सर्टिफ़िकेट भी मिल गया. कुछ दिनों के अंदर देश में कोरोना के केस आना शुरू हो गए. राजीव चौहान बताते हैं,
“हमने सोचा कि कोरोना के मरीज़ों के लिए हमारा ऑटमैटिक एम्बु बैग काफ़ी काम आएगा. इसके लिए हमने कई कम्पनियों को लेटर लिखा. सोचा कि अगर कोई ग्रुप सामने आता है तो इसके व्यापक स्तर पर प्रोडक्शन को मदद मिलेगी. हमें कुछ ही दिनों के भीतर महिंद्रा समूह के आनंद महिंद्रा की तरफ़ से फ़ोन आया. उन्होंने इस ऑटमैटिक एम्बु बैग में रुचि दिखाई.”

इसके बाद राजीव चौहान का कम्पनियों के अधिकारियों से पत्राचार शुरू हुआ. डिज़ाइन को लेकर तमाम क़िस्म की बातचीत भी होने लगी. इन सारी बातचीत का रिकॉर्ड लल्लनटॉप के पास मौजूद है. लेकिन 30 मार्च को राजीव चौहान ने पवन गोइनका का ट्वीट देखा, जिसका हमने ज़िक्र किया है. राजीव चौहान कहते हैं कि वे समझ गए कि उनका डिज़ाइन चोरी हो गया है.

राजीव चौहान कहते हैं,

“मेरे पास पेटेंट है. डिज़ाइन हमारी टीम ने तैयार किया है. अधिकतर बातचीत ईमेल के माध्यम से हुई है. सबका रीकॉर्ड मौजूद है. सब कुछ मिलने के बाद अगर महिंद्रा अगर इस डिज़ाइन और इस काम को अपना बता रहे हैं तो ये चोरी है. उन्होंने मेरा पेटेंट और हमारी मेहनत को चुराया है.”

इस चोरी के आरोपों पर महिंद्रा का क्या कहना है?

हमने इस पूरे मसले का ज़िक्र करते हुए आनंद महिंद्रा, पवन गोइनका समेत महिंद्रा के कई अधिकारियों को कई सवाल भेजे. 24 घंटों का वक़्त दिया. रिमाइंडर भी डाला. कहा कि आरोप हैं. आपके जवाब ज़रूरी हैं. उनकी ओर से कोई जवाब अब तक नहीं. जवाब आएगा, तो ज़रूरी बतायेंगे.

लेकिन वहीं राजीव चौहान हैं. जो कहते हैं,
“मुझे पैसे नहीं चाहिए. मेरी एक टीम की मेहनत है. हम लोगों के लिए काम करना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि इसका मास प्रोडक्शन हो. सस्ते दाम पर हो. लेकिन जिसकी मेहनत है. उसे कम से कम आप क्रेडिट तो देंगे न.”