पिता की हत्या का बदला लेने के लिए खेलने की उम्र में ही थाम लिया था हथियार, जेल से ही लड़ा था लोकसभा का चुनाव, पत्नी को जिताया था जिला परिषद का चुनाव

खगड़िया यानी फरकिया के दियारा इलाके में पहलवान के नाम से मशहूर रामानंद यादव के अपराध की दुनिया में कदम रखने के किस्से भी कम दिलचस्प नहीं हैं। जानकारों की मानें तो रामानंद यादव 60 के दशक में अपराध की दुनिया मे तब कदम रखा था जब उसके पिता गौहल यादव की हत्या कर दी गयी थी। हत्यारों को मौत के घाट उतारने के लिए महज 6 साल की उम्र में रामानंद ने खिलौने की जगह हथियार थाम लिया।
तब से अब तक तीन दर्जन से अधिक संगीन मामलों को अंजाम दिया। जिसमें कई हत्या, लूट और जमीन पर अवैध कब्जा शामिल है। रामानंद के खिलाफ न केवल खगड़िया जिले के थानों में केस दर्ज हैं, बल्कि सहरसा, समस्तीपुर और दरभंगा के थानों में भी वह वांछित था। वर्ष 2009 में एसटीएफ और खगड़िया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में रामानंद हथियार के जखीरे के साथ अलौली थाना इलाके से गिरफ्तार हुआ था।

खगड़िया पुलिस कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे जेल भेजी, लेकिन रामानंद यादव के गांव में जैसे ही पहलवान की गिरफ्तारी को सूचना मिली, दूसरे ही दिन गांव के लोगों ने रामानंद की रिहाई की मांग लेकर खगड़िया शहर में जमकर बवाल काटा। कई दुकानों और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था। हालांकि पुलिस की सख्ती के कारण मामला शांत हो गया, लेकिन विरोध प्रदर्शन में आई हजारों की भीड़ ने रामानंद यादव की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को बल दे दिया।

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में वह जेल से ही खगड़िया संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन उसे हार का मुंह देखना पड़ा। भले ही वह लोकसभा चुनाव नही जीता, लेकिन 2001 में वह अपने पंचायत आनन्दपुर माड़र से मुखिया का चुनाव जरूर जीत गया, जबकि पत्नी फूलो देवी जिला परिषद सदस्य बनीं।

रामानंद यादव मूलतः खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड के मोरकाही का रहने वाला था। लेकिन सहरसा जिले के भेलाही गांव में जमीन लेकर अपना मकान बनाया था और वह वहीं रहता था। रामानंद के बारे में बताया जाता है कि वह अपने इलाके में नक्सलियों को पनपने नहीं देता था। इलाके में कहीं भी नक्सली गतिविधि की जानकारी उसे मिलती थी तो वह पुलिस को इत्तला कर देता था। यही कारण था कि उसका पुलिस से भी कभी-कभी अच्छा संबंध रहता था। लेकिन आज गैंगवार में रामानंद यादव उर्फ पहलवान सदा-सदा के लिए खामोश हो गया।