साहब! आठ बच्चे भूखे हैं, हमें खाना भिजवा दो", और तुरंत हुई कारवाही

कोरोना वायरस के चलते देश में लगे लॉकडाउन की वजह से रोज कमाकर खाने वालों की लिए जीवन बसर करना भारी पड़ रहा है, हालाकि, सरकार की तरफ से हर तरह की मदद दी जा रही है ऐसे में ग्वालियर के जिला मुख्यालय से 20 किमी दूर लोहादेवी गांव से चाइल्ड हेल्प लाइन के 1098 नंबर पर एक व्यक्ति ने फोन लगाया। 
श्रीचंद जाटव नाम के इस व्यक्ति ने फोन पर कहा कि साहब! बच्चे भूखे हैं, हमें खाना भिजवा दो। हमारे आठ बच्चे हैं। घर में आटा खत्म हो गया है। तीन दिनों से बच्चों को चावल उबालकर खिला रहे हैं। लेकिन बच्चों का चावल से पेट नहीं भरता। बच्चे बार-बार रोटी मांग रहे हैं। इसलिए मजबूर होकर चाइल्ड हेल्प लाइन पर फोन लगाकर खाने के लिए मदद मांगनी पड़ी। सुखद बात यह रही कि सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्प लाइन टीम तुरंत लोहादेवी गांव पहुंची। शिवपुरी में संचालित मोदी किचिन से साथ लाए खाने के पैकेट बच्चों व उनके माता-पिता को दिए।

ग्राम लोहादेवी निवासी श्रीचंद जाटव और उसकी पत्नी फूलदेवी जाटव की सात बेटियां और एक बेटा है। श्रीचंद मकान बनाने का काम करता है। लॉकडाउन में काम बंद है, इसलिए घर रहना पड़ रहा है। घर में रखे सारे गेहूं पिसवा लिए। आटा तीन दिन पहले ही खत्म हो गया। अब सिर्फ सात किलो चावल ही बचे थे, जिन्हें उबालकर आठों बच्चे व खुद खा रहे थे। लेकिन चावलों से बच्चों का ठीक से पेट भी नहीं भर रहा था। बच्चे बार-बार रोटियां मांग रहे थे। इसलिए शुक्रवार को किसी ने चाइल्ड हेल्प लाइन नंबर 1098 दे दिया। श्रीचंद ने नंबर डायल कर अपने परिवार की स्थिति बताई और खाने की मांग रखी।

चाइल्ड हेल्प लाइन टीम के सदस्य संगीता चव्हाण और विनोद परिहार बाइक से लोहादेवी गांव पहुंचे। मोदी किचिन से लाए दस पैकेट परिवार को खाने के लिए दे दिए है। आठ बच्चों को लेकर श्रीचंद जाटव ने का कहना है कि उसकी पहली पत्नी शादी के बाद छोड़कर चली गई। नजदीक के गांव तानपुर की रहने वाली फूलवती के पति का देहांत हो गया। श्रीचंद की फूलवती दूसरी पत्नी है। इस तरह दोनों के 8 बच्चे हैं। मामले की सूचना पर कलेक्टर अनुग्रहा पी. ने जनपद के माध्यम से गेहूं पहुंचाने के निर्देश दिए। श्रीचंद ने बताया कि शाम को सेल्समैन 10 किग्रा गेहूं आकर दे गया। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र सुंदरियाल ने निर्देश देकर आंगनबाड़ी केंद्र से 7 टीएचआर पैकेट भिजवा दिए। जिससे बच्चे पोषण आहार खा सके।