कोरोना का कहर : नीम, तुलसी, कपूर का सैनिटाइजर तोड़ रहा कोरोना के संकट का जाल!

नीम, तुलसी, कपूर का प्राकृतिक सैनिटाइजर तोड़ रहा गांव-देहात में कोरोना के संकट का जाल। इस औषधीय तरल में परजीवियों से लड़ने और खत्म करने की क्षमता है। पर्यावरण को शुद्ध करने की विशेषता भी। खानपुर प्रखंड की नत्थूद्वार पंचायत के पर्यावरण सेवी त्रिपुरारी झा को इसे बनाने का श्रेय जाता है।
त्रिपुरारी बताते हैं कि तुलसी, अलबेला, नीम के साथ कपूर, फिटकरी, नींबू व काली मिर्च जैसे कीटाणुनाशक गुणवाले अवयव को निश्चित अनुपात में मिलाकर पानी में खौलाया जाता है। एक लीटर पानी जब एक चौथाई रह जाए तो उसे चूल्हे से उतार दिया जाता। कुछ देर के लिए ठंडा किया जाता। इस प्रक्रिया के बाद उसे स्वच्छ सूती कपड़े से छानकार किसी पात्र में जमा कर लिया जाता। गहरे हरे रंग में तैयार तरल हाथ को सैनिटाइज करने से लेकर पानी में डालकर नहाने के लिए उपयुक्त है। राजेश कुमार, मनीष कुमार व दिलीप सदा उनका सहयोग कर रहे।

घर में तैयार तरल को वे प्लास्टिक के छोटे-छोटे डिब्बों में पैक करते हैं। इसपर होनेवाले खर्च को आपस में मिलकर वहन करते। इसके बाद अलग-अलग होकर ग्रामीण इलाकों में निशुल्क वितरण करते। इस दौरान फिजिकल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखते। इस ग्रुप के सभी सदस्य मास्क व ग्लब्स पहनकर ही गावों में निकलते। इनका कहना है कि औषधीय तरल शारीरिक शुद्धता के साथ आवासीय परिवेश को भी सैनिटाइज करता है। 

इसकी निश्चित मात्रा को पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता। इससे आवासीय परिवेश को कीटाणुरहित किया जा सकता। देसी चिकित्सालय के आयुर्वेद के ज्ञाता डॉ. अनिल कुमार सिन्हा बताते हैं कि इस तरह का औषधीय तरल कीटाणुनाशक होता है। नीम, तुलसी, कपूर आदि के गुणों से हम सब वाकिफ हैं। यह प्राथमिक रूप से हमें कई प्रकार के परजीवियों से बचाने में सहायक हो सकता है।