लॉकडाउन : पैरों में पड़े छाले, चप्पल भी टूटी, "साहब ! मुझे मेरे घर पहुंचा दो"

साहब, चलते-चलते मेरे पैरों में छाले पड़ गए है और चला नहीं जा रहा है। मुझे अपने गांव जाना है कोई बस है क्या? यह प्रश्न एक-दो नहीं सैकंडों उन मजबूर मुसाफिरों के है जो काम-धंधे के लिए अपने गांव से दिल्ली, फरीदाबाद, नोयडा या फिर गुडग़ांव में रह रहे थे। कोरोना के कहर ने जब डराया तो इन मजदूर वर्ग के लोगों को शहर छोडक़र गांव जाने के लिए कहा गया। इन मजदूरों को जो साधन उसे चल दिए। इन मुसाफिरों ने कई किलोमीटर का सफर पैदल ही तय किया।
दिल्ली से आने वाली रामदुलारी तीन दिन पहले निकली हुई है। वही टीकमगढ़ जाने के लिए बस की तलाश कर रही थी। मालवा कॉलेज पर इन यात्रियों के ठहरने और जाने का प्रबंधन प्रशासन द्वारा किया जा रहा था। जब इन्होंने प्रशासनिक कर्मचारियों से बस के बारे में पूछताछ की तब वह नंगे पैर थी। मीडिया ने नंगे पैर होने के बारे में पूछा तो कहा कि चप्पले पैदल चलते हुए टूट गई। पैरों में छाले पड़ गए हैं कोई बस टीकमगढ़ जा रही हो तो बाबू मुझे भिजवा दो। तभी नगर निगम कर्मचारी शिशिर श्रीवास्तव ने उक्त महिला को चप्पल पहनने को दी। इसी तरह जो लोग आते जा रहे है उनका ठहरने खाने पीने का इंतजाम से किया जा रहा है।
दिल्ली के करालबाग में सीमेट सरिया और गिट्टी को रिक्शा से ढोकर अपना भरण पोषण करने वाले चार मजदूर दिलदार, हरिदास, सुनील और गोलू है जोकि अपने गांव की ओर निकल पड़े। वायपास हाईवे पर एक पेड़ के नीचे चारों मजदूर तपती दोपहर में विश्राम कर रहे थे। इन मजदूरों से उनकी मजबूरी के बारे में पूछा गया तो उन्होंन बताया कि तीन दिन से चल रहे है। वह सुबह 4 बजे से 11 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक सफर रिक्शा से तय करते हैं। हर रोज 80-90 किलोमीट रिक्शा बारी-बारी से चलाते हैं, जहां ठहरने का ठिकाना मिलता है वहीं विश्राम करते है। इन मजदूरों को कहना है कि रास्ते में लोगों का सपोर्ट मिल रहा है। रास्ते में लोगों द्वारा भोजन पानी की व्यवस्था किए जाने से कोई परेशानी नहीं आई।
राजस्थान से ग्वालियर तक आने वाले गोलू श्योपुर के बैराड़ के रहने वाले हैं। वह जौधपुर में रहकर पानी की टिक्की बेचा करते थे। राजस्थान पुलिस अपने प्रांत की सीमा तक छोड़ गई। इसके बाद पैदल आगरा पहुंचे। आगरा पुलिस ने ट्रक में बैठकर ग्वालियर तक भेजा। पुलिस की मदद से ग्वालियर तक आ गए। अपने गांव के लिए वाहन की तलाश हाईवे पर कर रहा हूं। कोसो दूरी को तपती धूप में नंगे पैर सफर कर रह मजदूरों को चप्पल पहनाने का इंतजाम जिला प्रशासन की ओर से किया गया। प्रशासनिक अफसरों द्वारा महिला, पुरूष और बच्चों के लिए हर साइज की चप्पल मंगाई गई। यह चप्पल को पहनकर यह मजदूर वर्ग को बढ़ी राहत मिल रही है। इन चप्पल के पहने के बाद उनका आगे का सफर कुछ सरल होगा।