दिल्‍ली सरकार ने कोरोना मरीजों के लिए बुक किया 5 सितारा ताज मानसिंह होटल, गंगाराम अस्पताल से हुआ अटैच!

दिल्ली की केजवीवाल सरकार ने दिल्‍ली के आइकॉनिक ताज मानसिंह होटल के सभी कमरों को कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किया हैं। बता दें दिल्‍ली में कोरोना के मरीजों की संख्‍या इतनी बढ़ती जा रही हैं कि अस्‍पतालों में मरीजों के लिए बेड़ कम पड़ते जा रहे हैं। ऐसे में अब होटलों को मैरेज हॉल को भी क्वारेंटीन सेंटर में तब्दील किया जाना शुरू किया जा रहा है।
दिल्ली सरकार ने कोरोना वायरस के उपचार हेतु सात अलग-अलग पांच सितारा होटलों को दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों के साथ जोड़ दिया है। मंगलवार को इसी क्रम में पांच सितारा होटल ताज मान सिंह होटल को गंगा राम अस्पताल से जोड़ा गया है। मतलब ये होटल अब गंगा राम हॉस्पिटल का एक्सटेंशन बन जाएगा। प्रशासन ने इसे लेकर आदेश जारी कर दिए हैं।

जानें कोरोना मरीजों के लिए होटल को क्या दी गई है जिम्मेदारी

बता दें दिल्ली सरकार के आदेश के मुताबिक, होटल के स्टाफ को प्रोटेक्टिव गियर और बेसिक ट्रेनिंग दी जाएगी। एंबुलेंस की सेवा हॉस्पिटल देगा। होटल में स्टाफ की कमी होने पर इसको अस्‍पताल प्रशासन दूर करेगा। होटल के अंदर कमरा, हाउसकीपिंग, साफ सफाई और मरीजों को खाना देने की जिम्मेदारी होटल की होगी। मरीजों से पैसा हॉस्पिटल लेगा और होटल को भुगतान करेगा। अगर हॉस्पिटल चाहे तो अपने डॉक्टर नर्स और दूसरे पैरामेडिकल स्टाफ को होटल में रुकवा सकता है, लेकिन इसके लिए जो खर्च आएगा वह हॉस्पिटल को खुद देना होगा।

जानिए कितना होगा रुम का किराया और कौन भरेगा होटल का बिल

दरअसल दिल्ली सरकार ने फैसला किया था कि दिल्ली में अस्पतालों में बेड की उपलब्धता बढ़ाने के लिए होटल को अस्पताल से जोड़ा जाय। सरकार के फैसले के मुताबिक पांच सितारा होटल में कमरे का किराया ₹5000 प्रति दिन होगा। पांच सितारा होटल में कोरोना रोगियों का उपचार होगा लेकिन होटल किसी भी रोगी से फीस नहीं वसूलेगा। रोगियों से फीस अस्पताल द्वारा ली जाएगी और अस्पताल ही होटलों को भुगतान करेंगे। आपसी सहमति से कमरों के रेट तय होने के उपरांत होटल में डॉक्टरए नर्स एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के रहने की व्यवस्था भी की जा सकेगी।यह पैसा मरीज हॉस्पिटल को देगा और हॉस्पिटल होटल को देगा। इसके अलावा ₹5000 प्रतिदिन अधिकतम हॉस्पिटल अपनी मेडिकल सेवाओं के लिए मरीज से ले सकता है। जिसमें सभी कुछ शामिल है। लेकिन अगर मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है तो ₹2000 प्रतिदिन का एक्स्ट्रा खर्च आएगा।

इसलिए सरकार को लेना पड़ा ये फैसला

कुछ विशेषज्ञों का आरोप हैं कि शॉपिंग मॉल और मंदिरों को खोलने में जल्दबाजी की गई जिसका नतीजा है कि कोरोना के मरीजों की संख्‍या में तेजी से इजाफा हो रहा है। COVID-19 से संक्रमित लोगों के कुछ परिवारों ने अस्पतालों में रिश्तेदारों के लिए बिस्तर न मिलने की शिकायत की। जिसके बाद ये अहम फैलला लिया गया।सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों के गलियारों में मरीज़ों को लिटा दिया गया था और एक अस्पताल की लॉबी में शव पड़े होने की खबर स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में आई जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्‍ली की AAP सरकार को अपना कार्य करने का आदेश दिया। बता दें इस समय दिल्ली में कुछ ही दिनों पूर्व 10,000 कोरोनोवायरस मामले थे, सोमवार को यह संख्या बढ़कर 41,000 हो गई। राजधानी में मामलों में वृद्धि हुई है। सरकार का अनुमान है कि जुलाई के अंत तक, लगभग 13 गुना वर्तमान संख्या में 550,000 COVID-19 मामले होंगे और इसके बाद 150,000 बेड की आवश्यकता होगी।