पलायन के बाद बचे मजदूरों और कारीगरों के साथ शुरू हो रहे हैं कारखाने, पटरी पर लौट रही है जिंदगी!

कोरोना वायरस के कारण देशभर में लगे लॉकडाउन के दौरान महाराष्ट्र के वसई और भयंदर के बर्तन कारखाने बंद पड़े रहे. वहीं अब लॉकडाउन के बाद अनलॉक में ये कारखाने दोबारा खुल रहे हैं. हालांकि बर्तन बनाने वाले इन स्टील के कारखानों में अभी सिर्फ पांच फ़ीसदी काम शुरू हुआ है. वहीं 95 फीसदी कारखाने बंद हैं.
मुंबई के पास वसई और भयंदर वह इलाके हैं जहां पर एशिया की सबसे बड़ी बर्तन बनाने की कारखाने हैं. यहां बनने वाले बर्तनों की सप्लाई पूरी दुनिया में होती है, लेकिन लॉकडाउन के 3 महीने के दौरान यहां के सभी कारखाने बंद पड़े थे. वहीं जैसे ही अनलॉक वन की शुरुआत हुई है, यहां बंद पड़े कारखानों बर्तन के कारखानों में चमक दिखने लगी है. कारखाना मालिक हो या कारीगर या फिर मजदूर सबको उम्मीद है कि जल्द ही अब सब कुछ ठीक हो जाएगा.
वसई में खाने की थाली बनाने वाले एक कारखाने में मौजूद कारीगरों ने बताया की लॉकडाउन के 3 महीने बहुत ही मुश्किल भरे थे, लेकिन अब उम्मीद है रोजी रोटी चलती रहेगी. कारखाने के मालिक आजम बताते हैं 'उनकी उनके कारखाने में करीब 12 लोग काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन के दौरान कारीगर और मजदूर चले गए. अब सिर्फ 3 कारीगरों से काम की शुरुआत की है. आगे काम धंधा कैसे चलेगा अभी पता नहीं है.'
मुंबई का भयंदर इलाका जो एशिया में सबसे बड़ी बर्तन बनाने की फैक्ट्री मानी जाती है. यहां भी अनलॉक वन की शुरुआत के साथ कुछ बर्तन बनाने के कारखाने शुरू हुए हैं. कारखाने के मालिक महिपाल वापना बताते हैं 'लॉकडाउन से पहले विदेशों से उन्हें जो आर्डर मिला था वह पूरा माल अभी कारखाने में पड़ा है. हम उसे भेज नहीं पाए. अब जो नए आर्डर मिल रहे हैं उसे बनाने के लिए हमारे पास कारीगर नहीं हैं. कारखाने की बहुत सारी मशीनें बंद पड़ी हैं सिर्फ एक दो मशीन है जिस पर बचे कुचे कारीगर काम कर रहे हैं.'
कारखाने में काम करने वाले कारीगरों का कहना है कि उनके सारे दोस्त पलायन के दौरान अपने घरों के लिए चले गए लेकिन उन्हें अपने मालिक से मदद मिली जिसकी वजह से उसने हिम्मत जुटाई और रुके रहे. अब धीरे-धीरे कारखाने का काम शुरू हो रहा है और उम्मीद है जल्द ही सब कुछ पटरी पर आ जाएगा और गांव जाने वाले उनके कारीगर दोस्त ही कुछ महीनों में लौट आएंगे. वहीं एक कारीगर का कहना है '3 महीने उन लोगों के मुश्किल भरे रहे अब इस इंडस्ट्री को सरकार के सहारे की जरूरत है बिजली के बिल टैक्स जैसी चीजों पर अगर सरकार थोड़ी रियायत देगी तो उन्हें आगे धंधा चलाने में काफी सहूलियत मिल सकती है.'
हालांकि बर्तन बनाने वाले इन स्टील के कारखानों में अभी सिर्फ पांच फ़ीसदी काम शुरू हुआ है. वहीं 95 फीसदी कारखाने बंद हैं, क्योंकि मुंबई समेत महाराष्ट्र में अभी भी कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में इन कारखाना मालिकों को उम्मीद है कि जल्द ही सब कुछ ठीक होगा और कारखाने फिर से शुरू होंगे.