चीन में बने ड्रोन से हिन्दुस्थान में हथियार भेज रहा है पाकिस्तान, साथ में मिले कार्बाइन और चीनी हैंड ग्रेनेड!

जम्मू-कश्मीर में भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगते कठुआ के पनसर इलाके में बीएसएफ ने शनिवार को जिस पाकिस्तानी ड्रोन को शूट किया है, वह चीन निर्मित है। इस ड्रोन को हेक्सा कॉप्टर कहा जाता है। ड्रोन के साथ जो हथियार मिले हैं, उनमें चीन निर्मित हैंड ग्रेनेड भी शामिल हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी लंबे समय से चीन में बने हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना ही नहीं, ड्रोन के साथ जो अमेरिका निर्मित एम-4 5.56 एमएम कार्बाइन मिली है, उसका इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना कर रही है।
यह कार्बाइन अमेरिकी कंपनी कोल्ट्स मेन्यूफेक्चरिंग तैयार करती होती है। इसका निर्माण सबसे पहले अमेरिकी सेना के लिए किया गया था। वहां पर आज भी यह कार्बाइन चलन में है। इसकी कीमत 1099 डॉलर बताई गई है। हेक्सा कॉप्टर पाकिस्तान की तरफ से आया था। इसके साथ जो हथियार एवं गोला बारूद था, वह आतंकियों तक भेजा जाना था। इसमें कार्बाइन के अलावा दो मैग्जीन और 7 हैंड ग्रेनेड भी थे। 5.56 राउंड की 60 बुलेट भी जब्त की गई हैं।
इनका इस्तेमाल भी पाकिस्तान सेना कर रही है। केंद्रीय सुरक्षा बलों से जुड़े एक आला अधिकारी बताते हैं कि हल्के वजन वाली एम-4 कार्बाइन काफी घातक मानी जाती है। पहले इसका इस्तेमाल केवल अमेरिकी सेना करती थी। बाद में नाटो सैन्य दलों को भी एम-4 कार्बाइन मुहैया कराई गई थी। उसके बाद कोल्ट्स ने इस हथियार की दुनिया के कई देशों में बिक्री शुरू कर दी। 2018 में पाकिस्तान, जॉर्डन व अफगानिस्तान सहित कई दूसरे देशों को करीब 10 हजार एम-4 कारबाइन सप्लाई की गई थीं।
 
इस कारबाइन का चैम्बर 5.56 मिमी का है और एकल-शॉट व तीन-राउंड बर्स्ट ऑपरेशन में यह सक्षम है। इसके सहायक उपकरण जैसे कि ऑप्टिक्स, थर्मल स्पेस, बिपोड, फोरग्रिप्स और लेजर को माउंट करने में सक्षम होते हैं। यह कार्बाइन एक पूर्ण बैरल, समायोज्य स्टॉक और हल्के वजन की विशेषता लिए है। पूर्ण आकार के राइफलों की सीरीज जैसे एआर-15 और एम-16 का विकसित मॉडल एम-4 को माना जाता है।
 
जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजी दिलबाग सिंह ने पिछले दिनों कहा था कि हमें ऐसी खुफिया सूचनाएं मिली हैं, जिसमें पाकिस्तान ड्रोन के जरिए आतंकियों को हथियार, हैंड ग्रेनेड और गोला बारूद भेज सकता है। कश्मीर घाटी में लगातार चले ऑपरेशन में एक के बाद एक टॉप आतंकवादी मारे जा रहे हैं। इस साल अभी तक 110 से ज्यादा आतंकियों को मारा जा चुका है। इनमें हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों के आतंकी शामिल हैं।
सुरक्षा बलों के नियमित सर्च ऑपरेशन की वजह से आतंकियों के पास हथियारों की कमी हो गई है। गत दिनों कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में हथियारों का जखीरा बरामद हुआ था। ये हथियार टीयूएम, अल बदर, एजीयूएच और आईएस-जेके आदि आतंकी संगठनों तक पहुंचाए जाने थे।