उम्मीद में लौटे थे गांव, काम नहीं मिलने पर फिर से मुंबई लौटने को तैयार हैं यूपी के टैक्सी-ऑटो ड्राइवर!

लॉकडाउन में हजारों लोग शहर छोड़कर अपने गांव लौट आए। उत्तर प्रदेश के बहुत सारे लोग जो मुंबई में ऑटो या टैक्सी चलाते हैं, वे अपनी गाड़ियां लेकर ही अपने गांव आ गए। काम बंद होने के चलते उनपर ईएमआई का बोझ बढ़ता ही जा रहा है। गांव में उन्हें कोई काम भी नहीं मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के उन दावों का भी कुछ नहीं हुआ, जिसमें कहा गया कि प्रवासी कामगारों को उनके कौशल के हिसाब से अब प्रदेश में ही काम दिया जाएगा। ऐसे में हताश होकर ऐसे ऑटो, टैक्सी ड्राइवर अब फिर से मुंबई लौटने की तैयारी कर रहे हैं।
हमारे सहयोगी अखबार मुंबई मिरर ने उत्तर प्रदेश के तीन जिलों- प्रतापगढ़, उन्नाव और जौनपुर में आए 35 ऑटो टैक्सी ड्राइवर से बात की। इन सभी का कहना है कि वे बस उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जिस दिन महाराष्ट्र सरकार फिर से ऑटो-टैक्सी चलाने की परमिशन देगी। फिलहाल ऑटो-टैक्सी में एसेंशियल सर्विसेज के लोग ही जा सकते हैं।

यूपी सरकार का था वादा, फिर भी नहीं मिल रहा कोई काम

प्रवासी कामगारों के लौटने के वक्त यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने वादा किया था कि अब उन्हें वापस नहीं जाना पड़ेगा और अपने प्रदेश में ही काम मिलेगा। जिन 35 लोगों से मुंबई मिरर ने बात की उन्हें अभी तक किसी भी प्रकार की रोजगार संबंधी सहायता नहीं मिली है। इसी बीच कंस्ट्रक्शन का काम करने वाले हजारों मजदूर और मिस्त्री दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों को लौट चुके हैं और किसी भी सरकारी संस्था ने उन्हें रोकने की कोई कोशिश नहीं की।
ड्राइवर कहते हैं कि उन्हें पता है मुंबई में कोरोना का खतरा सबसे ज्यादा है लेकिन अब उनके पास कोई विकल्प नहीं है। उन्नाव के एक गांव के ऑटो ड्राइवर ने कहा, 'हमारे पास ना तो जमीन है, ना ही कमाई का कोई दूसरा साधन। हमारी गाड़ियां मुंबई में रजिस्टर्ड हैं तो हम उन्हें यहां बहुत दूरी तक चला भी नहीं सकते हैं। छोटी दूरी के लिए हम अपने गांववालों और रिश्तेदारों से पैसे भी नहीं ले सकते। ऐसे में हमारी कमाई शून्य हो गई है।'